Deewaaron Ka Jungle (Deewaar / Soundtrack Version)
🎵 1225 characters
⏱️ 2:38 duration
🆔 ID: 10066677
📜 Lyrics
दीवारों का जंगल, जिसका आबादी है नाम
बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
दीवारों के इस जंगल में भटक रहे इंसान
अपने-अपने उलझे दामन झटक रहे इंसान
अपनी विपदा छोड़ के आए...
अपनी विपदा छोड़ के आए, कौन किसी के काम
बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
जितने घने हंगामें इसमें, उतनी घनी वीरानी
रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम...
रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम, मुल्ज़िम है हर शाम
बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
दीवारों के इस जंगल में भटक रहे इंसान
अपने-अपने उलझे दामन झटक रहे इंसान
अपनी विपदा छोड़ के आए...
अपनी विपदा छोड़ के आए, कौन किसी के काम
बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
जितने घने हंगामें इसमें, उतनी घनी वीरानी
रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम...
रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम, मुल्ज़िम है हर शाम
बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
⏱️ Synced Lyrics
[00:09.46] दीवारों का जंगल, जिसका आबादी है नाम
[00:18.28] बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
[00:27.48]
[00:49.26] दीवारों के इस जंगल में भटक रहे इंसान
[00:57.99] अपने-अपने उलझे दामन झटक रहे इंसान
[01:06.37] अपनी विपदा छोड़ के आए...
[01:10.95] अपनी विपदा छोड़ के आए, कौन किसी के काम
[01:19.58] बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
[01:28.90]
[01:37.04] सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
[01:50.02] सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
[01:58.72] जितने घने हंगामें इसमें, उतनी घनी वीरानी
[02:06.88] रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम...
[02:11.37] रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम, मुल्ज़िम है हर शाम
[02:20.34] बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
[02:28.96]
[00:18.28] बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
[00:27.48]
[00:49.26] दीवारों के इस जंगल में भटक रहे इंसान
[00:57.99] अपने-अपने उलझे दामन झटक रहे इंसान
[01:06.37] अपनी विपदा छोड़ के आए...
[01:10.95] अपनी विपदा छोड़ के आए, कौन किसी के काम
[01:19.58] बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
[01:28.90]
[01:37.04] सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
[01:50.02] सीने ख़ाली, आँखे सूनी, चेहरों पर हैरानी
[01:58.72] जितने घने हंगामें इसमें, उतनी घनी वीरानी
[02:06.88] रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम...
[02:11.37] रातें क़ातिल, सुबहें मुजरिम, मुल्ज़िम है हर शाम
[02:20.34] बाहर से चुप-चुप लगता है, अंदर है कोहराम
[02:28.96]