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Hanuman Chalisa - Reprise

👤 Pandit Jasraj 🎼 Anjaneya ⏱️ 10:27
🎵 5776 characters
⏱️ 10:27 duration
🆔 ID: 10456039

📜 Lyrics

॥दोहा॥
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनौ रघुबर बिमल जसु, जो दैयकु फल चारि।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि, हरहु कलेस बिकार।
॥चौपाई॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा
हाथ बजरा औ ध्वजा बिराजे। काँधे मूंज जनेऊ साजे
संकर सुवन केसरीनन्दन। तेज प्रताप महा जग बंदन
बिद्याबाण गुनि अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया
सूक्ष्म रूप धरि सियाहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंका जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे
लाये सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भारत ही सम भाई
सहस बदन तुम्म्हरो जस गावें। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं
सनकादिक ब्रम्हादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहिसा
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके काहां ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाये राजपद दीन्हा
तुम्रो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानु
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जल्दी लांघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जीते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना
आपां तेज सम्हारो आपै। तीनो लोक हांक ते कानपेन
भूत पिसाच निकट नहीं आवे। महाबीर जब नाम सुनावे
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट ते हनुमान छुड़ावे। मन क्रम बचन ध्यान जो लावे
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम सजा
और मनोरथ जो कोई लावे। सोइ अमित जीवन फल पावे
चारो जुग परताप तुम्हारा। है पारसिद्ध जगत उजियारा
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हारे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा
तुम्हारे भजन राम को पावे। जनम जनम के दुःख बिसरावे
अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जनम हरि-भक्त कहै
और देवता चित्त न धरै। हनुमत सेइ सर्ब सुख करायी
संकट कटे मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहुँ गुरुदेव की नाइ
जो सात बार पथ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होइ
जो ये पढ़े हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरिचेरा। कीजे नाथ हृदय महं डेरा
॥दोहा॥
पावनतनये संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सूर भूप

⏱️ Synced Lyrics

[00:02.82] ॥दोहा॥
[00:10.72] श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
[00:24.58] बरनौ रघुबर बिमल जसु, जो दैयकु फल चारि।
[00:35.07] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन-कुमार।
[00:45.24] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि, हरहु कलेस बिकार।
[00:55.36] ॥चौपाई॥
[00:58.55] जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
[01:31.04] राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा
[01:41.30] महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी
[01:53.46] कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा
[02:04.31] हाथ बजरा औ ध्वजा बिराजे। काँधे मूंज जनेऊ साजे
[02:16.48] संकर सुवन केसरीनन्दन। तेज प्रताप महा जग बंदन
[02:29.13] बिद्याबाण गुनि अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर
[02:38.88] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया
[02:50.81] सूक्ष्म रूप धरि सियाहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंका जरावा
[03:01.74] भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे
[03:11.02] लाये सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये
[03:42.31] रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भारत ही सम भाई
[03:52.66] सहस बदन तुम्म्हरो जस गावें। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं
[04:05.06] सनकादिक ब्रम्हादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहिसा
[04:16.55] जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके काहां ते
[04:27.72] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाये राजपद दीन्हा
[04:38.27] तुम्रो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना
[04:50.22] जुग सहस्त्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानु
[05:00.19] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जल्दी लांघि गये अचरज नाहीं
[05:12.73] दुर्गम काज जगत के जीते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
[05:23.52] राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे
[05:35.97] सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना
[05:46.19] आपां तेज सम्हारो आपै। तीनो लोक हांक ते कानपेन
[05:58.40] भूत पिसाच निकट नहीं आवे। महाबीर जब नाम सुनावे
[06:09.41] नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा
[06:39.02] संकट ते हनुमान छुड़ावे। मन क्रम बचन ध्यान जो लावे
[06:49.32] सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम सजा
[07:01.80] और मनोरथ जो कोई लावे। सोइ अमित जीवन फल पावे
[07:11.99] चारो जुग परताप तुम्हारा। है पारसिद्ध जगत उजियारा
[07:24.26] साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे
[07:34.96] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता
[07:47.24] राम रसायन तुम्हारे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा
[07:57.81] तुम्हारे भजन राम को पावे। जनम जनम के दुःख बिसरावे
[08:09.77] अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जनम हरि-भक्त कहै
[08:20.61] और देवता चित्त न धरै। हनुमत सेइ सर्ब सुख करायी
[08:32.62] संकट कटे मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
[08:42.85] जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहुँ गुरुदेव की नाइ
[08:55.14] जो सात बार पथ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होइ
[09:07.31] जो ये पढ़े हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा
[09:18.05] तुलसीदास सदा हरिचेरा। कीजे नाथ हृदय महं डेरा
[09:44.78] ॥दोहा॥
[09:48.03] पावनतनये संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
[10:03.06] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सूर भूप
[10:17.25]

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