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Din Kuch Aise Guzarta Hai Koi

👤 Jagjit Singh 🎼 Marasim ⏱️ 5:19
🎵 1801 characters
⏱️ 5:19 duration
🆔 ID: 11048211

📜 Lyrics

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

आईना देखकर तसल्ली हुई
आईना देखकर तसल्ली हुई

हमको इस घर में जानता है कोई
हमको इस घर में जानता है कोई
हमको इस घर में जानता है कोई
हमको इस घर में जानता है कोई

पक गया है शहर पे फल शायद
पक गया है शहर पे फल शायद

फिर से पत्थर उछालता है कोई
फिर से पत्थर उछालता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

तुम्हारे ग़म की डली उठाकर
ज़बाँ पे रख ली है देखो मैंने
ये क़तरा-क़तरा पिघल रही है
मैं क़तरा-क़तरा ही जी रहा हूँ

देर से गूँजते हैं सन्नाटे
देर से गूँजते हैं सन्नाटे

जैसे हमको पुकारता है कोई
जैसे हमको पुकारता है कोई
जैसे हमको पुकारता है कोई
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई

⏱️ Synced Lyrics

[00:21.31] दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
[00:32.43] दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
[00:41.35] जैसे एहसाँ उतारता है कोई
[00:49.67] दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
[00:58.41]
[01:20.89] आईना देखकर तसल्ली हुई
[01:32.28] आईना देखकर तसल्ली हुई
[01:40.71] हमको इस घर में जानता है कोई
[01:49.29] हमको इस घर में जानता है कोई
[01:57.67] हमको इस घर में जानता है कोई
[02:06.15] हमको इस घर में जानता है कोई
[02:14.16]
[02:37.19] पक गया है शहर पे फल शायद
[02:48.39] पक गया है शहर पे फल शायद
[02:57.04] फिर से पत्थर उछालता है कोई
[03:05.41] फिर से पत्थर उछालता है कोई
[03:13.76] जैसे एहसाँ उतारता है कोई
[03:22.50] दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
[03:30.88]
[03:35.68] तुम्हारे ग़म की डली उठाकर
[03:39.49] ज़बाँ पे रख ली है देखो मैंने
[03:43.15] ये क़तरा-क़तरा पिघल रही है
[03:45.80] मैं क़तरा-क़तरा ही जी रहा हूँ
[03:53.12] देर से गूँजते हैं सन्नाटे
[04:04.50] देर से गूँजते हैं सन्नाटे
[04:13.31] जैसे हमको पुकारता है कोई
[04:21.42] जैसे हमको पुकारता है कोई
[04:29.91] जैसे हमको पुकारता है कोई
[04:38.53] दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
[04:46.86] जैसे एहसाँ उतारता है कोई
[04:55.90]

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