Batwara
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📜 Lyrics
एक माटी आला चूल्हा और एके थी परात
जड़ै बैठ कै नै कट्ठे रोटी खाया करदे
बिना चोपड़ी भी एक आधी जै दे देदी माँ
कदे रोटियां म कमी ना बताया करदे
आज होंगे बटवारे, दोनु भाई होगे न्यारे
बटी धरती, कनाल थी जो 4 लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै
टेम बेरा ना के करवा दे, बख्त करा ग्या कारे
भैंसा के और गाया के भी खूंटे होगे न्यारे
ढूंढ उजड़ा बसा दे, और बसदा उजाड़ै
जब लिकडै बेकार भी ये नार लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै
न्यारी खाट बिछा दी माँ की, गेरी तुड़ी आले म
वा फेर भी रब तै दुआ करै थम बसदे रहो किनाले म
एक हांडी दो पेट, एक बारणा दो गेट
कित बाबू रुल ग्या नसवार लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै
गमा का पहाड़ का केपी कुंडू तीर मार ग्या
रोज का कलेस मासूम साझे सिर पाड़ ग्या
टूटे दर्दा के बाँध, आज गेर द्यो या कांध
कदे जुड़दे ना टूटे परिवार लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै
जड़ै बैठ कै नै कट्ठे रोटी खाया करदे
बिना चोपड़ी भी एक आधी जै दे देदी माँ
कदे रोटियां म कमी ना बताया करदे
आज होंगे बटवारे, दोनु भाई होगे न्यारे
बटी धरती, कनाल थी जो 4 लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै
टेम बेरा ना के करवा दे, बख्त करा ग्या कारे
भैंसा के और गाया के भी खूंटे होगे न्यारे
ढूंढ उजड़ा बसा दे, और बसदा उजाड़ै
जब लिकडै बेकार भी ये नार लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै
न्यारी खाट बिछा दी माँ की, गेरी तुड़ी आले म
वा फेर भी रब तै दुआ करै थम बसदे रहो किनाले म
एक हांडी दो पेट, एक बारणा दो गेट
कित बाबू रुल ग्या नसवार लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै
गमा का पहाड़ का केपी कुंडू तीर मार ग्या
रोज का कलेस मासूम साझे सिर पाड़ ग्या
टूटे दर्दा के बाँध, आज गेर द्यो या कांध
कदे जुड़दे ना टूटे परिवार लोगो रै
चीन की दिवार तै भी ऊँची लागै सै
खड़ी घर के बिचालै जो दिवार लोगो रै