Raat Bhar Sard Hava Chalti Rahi
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⏱️ 1:49 duration
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📜 Lyrics
रात भर सर्द हवा चलती रही
रात भर हमने अलाव तापा
रात भर सर्द हवा चलती रही
रात भर हमने अलाव तापा
मैंने माज़ी से कई खुश्क सी शाखें काटी
तुमने भी गुजरे हुए लमहों के पत्ते तोड़े
मैंने जेबों से निकाली सभी सूखी नज़्में
तुमने भी हाथों से मुरझाए हुए खत खोले
अपनी इन आँखों से मैंने कई माँझे तोड़े
और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकी
तुमने पलकों पे नमी सूख गई थी, सो गिरा दी
रात भर जो भी मिला उगते बदन पर हमको
काट के दाल दिया जलाते अलाव में उसे
रात भर फूँकों से हर लौ को जगाए रखा
और दो जिस्मों के ईंधन को जलाए रखा
रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने
रात भर हमने अलाव तापा
रात भर सर्द हवा चलती रही
रात भर हमने अलाव तापा
मैंने माज़ी से कई खुश्क सी शाखें काटी
तुमने भी गुजरे हुए लमहों के पत्ते तोड़े
मैंने जेबों से निकाली सभी सूखी नज़्में
तुमने भी हाथों से मुरझाए हुए खत खोले
अपनी इन आँखों से मैंने कई माँझे तोड़े
और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकी
तुमने पलकों पे नमी सूख गई थी, सो गिरा दी
रात भर जो भी मिला उगते बदन पर हमको
काट के दाल दिया जलाते अलाव में उसे
रात भर फूँकों से हर लौ को जगाए रखा
और दो जिस्मों के ईंधन को जलाए रखा
रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने
⏱️ Synced Lyrics
[00:08.41] रात भर सर्द हवा चलती रही
[00:15.23] रात भर हमने अलाव तापा
[00:22.56] रात भर सर्द हवा चलती रही
[00:26.45] रात भर हमने अलाव तापा
[00:32.25] मैंने माज़ी से कई खुश्क सी शाखें काटी
[00:37.60] तुमने भी गुजरे हुए लमहों के पत्ते तोड़े
[00:43.06] मैंने जेबों से निकाली सभी सूखी नज़्में
[00:49.40] तुमने भी हाथों से मुरझाए हुए खत खोले
[00:56.69] अपनी इन आँखों से मैंने कई माँझे तोड़े
[01:01.76] और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकी
[01:08.38] तुमने पलकों पे नमी सूख गई थी, सो गिरा दी
[01:15.87] रात भर जो भी मिला उगते बदन पर हमको
[01:20.02] काट के दाल दिया जलाते अलाव में उसे
[01:26.32] रात भर फूँकों से हर लौ को जगाए रखा
[01:31.27] और दो जिस्मों के ईंधन को जलाए रखा
[01:36.86] रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने
[01:41.84]
[00:15.23] रात भर हमने अलाव तापा
[00:22.56] रात भर सर्द हवा चलती रही
[00:26.45] रात भर हमने अलाव तापा
[00:32.25] मैंने माज़ी से कई खुश्क सी शाखें काटी
[00:37.60] तुमने भी गुजरे हुए लमहों के पत्ते तोड़े
[00:43.06] मैंने जेबों से निकाली सभी सूखी नज़्में
[00:49.40] तुमने भी हाथों से मुरझाए हुए खत खोले
[00:56.69] अपनी इन आँखों से मैंने कई माँझे तोड़े
[01:01.76] और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकी
[01:08.38] तुमने पलकों पे नमी सूख गई थी, सो गिरा दी
[01:15.87] रात भर जो भी मिला उगते बदन पर हमको
[01:20.02] काट के दाल दिया जलाते अलाव में उसे
[01:26.32] रात भर फूँकों से हर लौ को जगाए रखा
[01:31.27] और दो जिस्मों के ईंधन को जलाए रखा
[01:36.86] रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने
[01:41.84]