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Rog

👤 Darzi 🎼 Awaaz ⏱️ 5:41
🎵 2275 characters
⏱️ 5:41 duration
🆔 ID: 12978992

📜 Lyrics

अरे पड़ गया जोग
ज़लील है भोग
नए नए लोग देखे
लग गया रोग

डर गए वह
घर गए वह
जहाँ भी चले गए
मर गए वह

छीनी है हसी
चुप रह गयी
ज़िंदा हूँ मगर
सांसें बंद हो गयी

कैसा है ये मोह
दिख गया जो
उसी के ही पीछे अब
पड़ गया वह



अरे लग गया रोग

शाम सवेरे दिल में
अंधेरा रहता है
काटती हूँ मैं खुदको
घाव गहरा लगता है
देखती हूँ शीशे में
आसूं बह जाती हूँ
मोटी या फिर काली
सबको मैं लगती हूँ

ली है मेरी जान
हूँ मैं परेशान
दिल भी है टुटा
अब टूटे अरमान

रोया आसमान
भीगा है जहान
मिट्टी भी है भूरी
भूरा मेरा है नकाब

कैसा है ये रोग
लगता है रोज़
जाता है नहीं कहीं
है ये घनघोर

चलती हवा
उड़ता बयान
पूछती हूँ अब भी
क्या नहीं मैं इंसान



क्या नहीं मैं इंसान

शाम सवेरे दिल में
अंधेरा रहता है
काटती हूँ मैं खुदको
घाव गहरा लगता है
देखती हूँ शीशे में
आसूं बह जाती हूँ
मोटी या फिर काली
सबको मैं लगती हूँ

जैसी भी हूँ काफी
मैं कब हो पाउंगी
खुद को ही मैं माफ़ी
अब कब दे पाउंगी
डूब मरूंगी लेकिन
मैं सब सह जाउंगी
खुद से ही मैं नफरत
अब ना कर पाउंगी

⏱️ Synced Lyrics

[01:01.89] अरे पड़ गया जोग
[01:03.83] ज़लील है भोग
[01:05.87] नए नए लोग देखे
[01:07.86] लग गया रोग
[01:09.85] डर गए वह
[01:11.73] घर गए वह
[01:13.65] जहाँ भी चले गए
[01:15.64] मर गए वह
[01:17.50] छीनी है हसी
[01:19.56] चुप रह गयी
[01:21.48] ज़िंदा हूँ मगर
[01:22.91] सांसें बंद हो गयी
[01:25.38] कैसा है ये मोह
[01:27.25] दिख गया जो
[01:29.11] उसी के ही पीछे अब
[01:31.13] पड़ गया वह
[01:33.01] आ
[01:36.87] आ
[01:39.79] अरे लग गया रोग
[01:48.59] शाम सवेरे दिल में
[01:51.89] अंधेरा रहता है
[01:56.02] काटती हूँ मैं खुदको
[01:59.53] घाव गहरा लगता है
[02:03.88] देखती हूँ शीशे में
[02:07.35] आसूं बह जाती हूँ
[02:11.64] मोटी या फिर काली
[02:15.10] सबको मैं लगती हूँ
[03:21.39] ली है मेरी जान
[03:23.32] हूँ मैं परेशान
[03:25.38] दिल भी है टुटा
[03:27.15] अब टूटे अरमान
[03:29.22] रोया आसमान
[03:31.11] भीगा है जहान
[03:32.92] मिट्टी भी है भूरी
[03:34.49] भूरा मेरा है नकाब
[03:36.97] कैसा है ये रोग
[03:38.75] लगता है रोज़
[03:40.74] जाता है नहीं कहीं
[03:42.61] है ये घनघोर
[03:44.75] चलती हवा
[03:46.60] उड़ता बयान
[03:48.48] पूछती हूँ अब भी
[03:50.16] क्या नहीं मैं इंसान
[03:52.38] आ
[03:56.24] आ
[03:58.68] क्या नहीं मैं इंसान
[04:07.82] शाम सवेरे दिल में
[04:11.35] अंधेरा रहता है
[04:15.66] काटती हूँ मैं खुदको
[04:19.01] घाव गहरा लगता है
[04:23.35] देखती हूँ शीशे में
[04:26.75] आसूं बह जाती हूँ
[04:31.03] मोटी या फिर काली
[04:34.48] सबको मैं लगती हूँ
[04:38.75] जैसी भी हूँ काफी
[04:42.30] मैं कब हो पाउंगी
[04:46.63] खुद को ही मैं माफ़ी
[04:49.85] अब कब दे पाउंगी
[04:54.28] डूब मरूंगी लेकिन
[04:57.75] मैं सब सह जाउंगी
[05:02.03] खुद से ही मैं नफरत
[05:05.43] अब ना कर पाउंगी
[05:13.38]

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