Ye Na Thi Hamari Kismat (Duet)
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📜 Lyrics
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ला ला ला ला
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
अगर और जीते रहते
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता
अगर और जीते रहते
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ला ला ला ला
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
अगर और जीते रहते
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता
अगर और जीते रहते
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता