Tere Dham Ka Pani
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📜 Lyrics
तू बदले नई नई क्यारी रै
घणी होण्दी जा सै प्यारी रै
तू बदले नई नई क्यारी रै
घणी होण्दी जा सै प्यारी रै
तेरे हुस्न का भाग एड़े
जाग गया वैरन रै
तेरे हुस्न का भाग एड़े
जाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
वोडका की बोतल बर्गा
रूप कसूता ले री सै
मीठा बरोड़ा घट घट पी गया
याही इच्छा मेरी सै
जब तेरी बेबे नै बुलाई थी
तू कती सुगली सी आई थी
जब तेरी बेबे नै बुलाई थी
तू कती सुगली सी आई थी
10 दिन में ये भोलपण तेरा
भाग गया वैरन रै
10 दिन में ये भोलपण तेरा
भाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
शुरू चढ़ती उमर तेरी
चाहिए कुछ शर्माणा रै
बेबे की ससुराल में आके
ठीक न गिरकाणा रै
तू घणी गाल में डोले सै
पानी नै पापा बोले सै
तू घणी गाल में डोले सै
पानी नै पापा बोले सै
लांबी चोटी डूंगे लटके नाग सा वैरन रै
लांबी चोटी डूंगे लटके नाग सा वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
हूँ मोटी-मोटी आखियां में
गाल कै नै स्याही तू
जब चुबारे रोज़ दोपहरें
तोड़े जया अंगड़ाई तू
तू हद तै ज्यादा निखरी सै
छोरयां के दिल में उतरी रै
तू हद तै ज्यादा निखरी सै
छोरयां के दिल में उतरी रै
अजमेहर सिंह का गांव कुलांबा
फाब गया वैरन रै
अजमेहर सिंह का गांव कुलांबा
फाब गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
घणी होण्दी जा सै प्यारी रै
तू बदले नई नई क्यारी रै
घणी होण्दी जा सै प्यारी रै
तेरे हुस्न का भाग एड़े
जाग गया वैरन रै
तेरे हुस्न का भाग एड़े
जाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
वोडका की बोतल बर्गा
रूप कसूता ले री सै
मीठा बरोड़ा घट घट पी गया
याही इच्छा मेरी सै
जब तेरी बेबे नै बुलाई थी
तू कती सुगली सी आई थी
जब तेरी बेबे नै बुलाई थी
तू कती सुगली सी आई थी
10 दिन में ये भोलपण तेरा
भाग गया वैरन रै
10 दिन में ये भोलपण तेरा
भाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
शुरू चढ़ती उमर तेरी
चाहिए कुछ शर्माणा रै
बेबे की ससुराल में आके
ठीक न गिरकाणा रै
तू घणी गाल में डोले सै
पानी नै पापा बोले सै
तू घणी गाल में डोले सै
पानी नै पापा बोले सै
लांबी चोटी डूंगे लटके नाग सा वैरन रै
लांबी चोटी डूंगे लटके नाग सा वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
हूँ मोटी-मोटी आखियां में
गाल कै नै स्याही तू
जब चुबारे रोज़ दोपहरें
तोड़े जया अंगड़ाई तू
तू हद तै ज्यादा निखरी सै
छोरयां के दिल में उतरी रै
तू हद तै ज्यादा निखरी सै
छोरयां के दिल में उतरी रै
अजमेहर सिंह का गांव कुलांबा
फाब गया वैरन रै
अजमेहर सिंह का गांव कुलांबा
फाब गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै
म्हारे गांव का पानी तेरे लाग गया वैरन रै