Ravan vs Ram
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📜 Lyrics
लंका में लंकापति की ईशा
इतनी सवस्था से कोई पूरी नहीं करता
लंकापति स्वयम आपने दिल से अपनी ईशा पूरी करता है
हाहा हआ
हाहा हआ
रावण हूँ मैं रावण
मुझसे बलशाली ना कोई यहाँ
रणभूमि में लड़ सके जो
वीर ऐसा ना कोई हुआ
बड़े बड़े शूरवीर भी
सामने ना आते हैं
राहु केतु और शनि भी
नाम से घबराते हैं
कुम्भकर्ण के खौफ से
ये पास कभी ना आते हैं
हुंकार से उसकी दूर से ही
सब काँपके मर जाते हैं
मेघनाथ सा शक्तिशाली
कोई नहीं इस लोक में उसकी
शक्तियों के चर्चे तो
होते हैं परलोक में
इंद्र जैसे देवता मेरे
मेघनाथ से हारे हैं
सामने उसकी ताकत के ये
सारे ही बेचारे हैं
मार सके जो कोई मुझे
वीर यहाँ न धरती पे
मैं लंका का लंकेश हूँ
प्रकोप से दुनिया डरती है
वनवासी वो राम मेरा यहाँ
कुछ भी न कर सकता है
शांत सा स्वभाव वाला
प्रचंड सेना से डरता है
हाँ सेना का ये रूप विशाल
सेना की गरजन भरी है और
सारे युद्ध जीते मेंने
युद्ध कभी न हारे हैं
सोने की लंका वाला हूँ जो
चाहे वो कर सकता हूँ
मैं रावण हूँ मैं रावण
ना सामने किसी के झुकता हूँ
ये पृथ्वी लोक मेरा है
यहाँ एकमात्र राजा मैं
मैं काल का भी काल हूँ
ना डरता किसी की माया से
वनवासिनी की पत्नी का भी
हरण किया मैंने चाल से
कोई क्या ही बिगाड़े मेरा
सब डरते मेरे बल से
असत्य को चरम सीमा पे
पहुँचाना मेरा काम है
मैं लंकापति लंकेश हूँ
और रावण मेरा नाम है
अब तुम्हारा अंत आ चूका है
अब रूप मेरा प्रचंड देख
तरकश में मेरे बाण देख
नाभि में तेरी जान देख
मेरे हाथ में तेरे प्राण देख
अब जलती हुई तेरी लंका देख
तू तेरा सर्वनाश देख
बिखरा तेरा परिवार देख
रणभूमि को तू लाल देख
खुंभकर्ण का काल देख
मृत्यु तेरी अकाल देख
तू मेघनाथ का हाल देख
असत्य की तू हार देख
तेरी प्रजा की गुहार देख
शयापर लेती जान देख
तू देख बस क्या होता है
मेरी माया का जाल देख
मैं वनवासी हूँ कोई ना
लंका सोने की राख देख
आँखों में मेरे धरती है
मेरे पैर तले पाताल देख
गलती कर दी रावण तूने
जो वनवासी मुझे मान के
मैंने ही भेजा धरती पर
तेरी देह में प्राण डाल के
शांत मेरा स्वभाव तो क्या
मैं मर्यादा में रहता हूँ
तुझे लग रहा मैं भोला सा
मैं हर बात ही सहता हूँ
प्राणों से भी प्रिय मेरी
सीते का तूने हरण किया
जीवन के सारे कर्मों में
ये कर्म तो तूने गलत किया
अब देख तेरी क्या दुर्दशा
तू तेरा सब कुछ खो देगा
भीख माँगके प्राणों की
तू फुट-फुट कर रोएगा
तू याद करेगा काश
मुझसे होती न ये गलती
अहंकार में डूबा तू
जल्दी मांगेगा माफी
पल में टूटे अहंकार तेरा
सर्वनाश तो निश्चित है
ना माफी के भी लायक तू
ना लायक है तू प्रायश्चित के
नारी के अपमान से बड़ा
ना पाप यहाँ इस धरती पे
माफ करूँ तो कैसे करूँ
कर दी बड़ी ही गलती रे
इतनी सवस्था से कोई पूरी नहीं करता
लंकापति स्वयम आपने दिल से अपनी ईशा पूरी करता है
हाहा हआ
हाहा हआ
रावण हूँ मैं रावण
मुझसे बलशाली ना कोई यहाँ
रणभूमि में लड़ सके जो
वीर ऐसा ना कोई हुआ
बड़े बड़े शूरवीर भी
सामने ना आते हैं
राहु केतु और शनि भी
नाम से घबराते हैं
कुम्भकर्ण के खौफ से
ये पास कभी ना आते हैं
हुंकार से उसकी दूर से ही
सब काँपके मर जाते हैं
मेघनाथ सा शक्तिशाली
कोई नहीं इस लोक में उसकी
शक्तियों के चर्चे तो
होते हैं परलोक में
इंद्र जैसे देवता मेरे
मेघनाथ से हारे हैं
सामने उसकी ताकत के ये
सारे ही बेचारे हैं
मार सके जो कोई मुझे
वीर यहाँ न धरती पे
मैं लंका का लंकेश हूँ
प्रकोप से दुनिया डरती है
वनवासी वो राम मेरा यहाँ
कुछ भी न कर सकता है
शांत सा स्वभाव वाला
प्रचंड सेना से डरता है
हाँ सेना का ये रूप विशाल
सेना की गरजन भरी है और
सारे युद्ध जीते मेंने
युद्ध कभी न हारे हैं
सोने की लंका वाला हूँ जो
चाहे वो कर सकता हूँ
मैं रावण हूँ मैं रावण
ना सामने किसी के झुकता हूँ
ये पृथ्वी लोक मेरा है
यहाँ एकमात्र राजा मैं
मैं काल का भी काल हूँ
ना डरता किसी की माया से
वनवासिनी की पत्नी का भी
हरण किया मैंने चाल से
कोई क्या ही बिगाड़े मेरा
सब डरते मेरे बल से
असत्य को चरम सीमा पे
पहुँचाना मेरा काम है
मैं लंकापति लंकेश हूँ
और रावण मेरा नाम है
अब तुम्हारा अंत आ चूका है
अब रूप मेरा प्रचंड देख
तरकश में मेरे बाण देख
नाभि में तेरी जान देख
मेरे हाथ में तेरे प्राण देख
अब जलती हुई तेरी लंका देख
तू तेरा सर्वनाश देख
बिखरा तेरा परिवार देख
रणभूमि को तू लाल देख
खुंभकर्ण का काल देख
मृत्यु तेरी अकाल देख
तू मेघनाथ का हाल देख
असत्य की तू हार देख
तेरी प्रजा की गुहार देख
शयापर लेती जान देख
तू देख बस क्या होता है
मेरी माया का जाल देख
मैं वनवासी हूँ कोई ना
लंका सोने की राख देख
आँखों में मेरे धरती है
मेरे पैर तले पाताल देख
गलती कर दी रावण तूने
जो वनवासी मुझे मान के
मैंने ही भेजा धरती पर
तेरी देह में प्राण डाल के
शांत मेरा स्वभाव तो क्या
मैं मर्यादा में रहता हूँ
तुझे लग रहा मैं भोला सा
मैं हर बात ही सहता हूँ
प्राणों से भी प्रिय मेरी
सीते का तूने हरण किया
जीवन के सारे कर्मों में
ये कर्म तो तूने गलत किया
अब देख तेरी क्या दुर्दशा
तू तेरा सब कुछ खो देगा
भीख माँगके प्राणों की
तू फुट-फुट कर रोएगा
तू याद करेगा काश
मुझसे होती न ये गलती
अहंकार में डूबा तू
जल्दी मांगेगा माफी
पल में टूटे अहंकार तेरा
सर्वनाश तो निश्चित है
ना माफी के भी लायक तू
ना लायक है तू प्रायश्चित के
नारी के अपमान से बड़ा
ना पाप यहाँ इस धरती पे
माफ करूँ तो कैसे करूँ
कर दी बड़ी ही गलती रे