Dost Ghamkhwaari Mein Meri
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⏱️ 2:35 duration
🆔 ID: 24325970
📜 Lyrics
दोस्त ग़म-ख़्वारी में मेरी सई फ़रमावेंगे क्या
ज़ख़्म के भरने तलक नाख़ुन ना बढ़ जावेंगे क्या
हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
कोई मुझको ये तो समझा दो कि समझावेंगे क्या
'गर किया नासेह ने हमको क़ैद (अच्छा! यूँ सही)
ये जुनून-ए-इश्क़ के अंदाज़ छुट जावेंगे क्या
ख़ाना-ज़ाद-ए-ज़ुल्फ़ हैं, ज़ंजीर से भागेंगे क्यूँ
हैं गिरफ़्तार-ए-वफ़ा, ज़िंदाँ से घबरावेंगे क्या
हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
हमने ये माना कि दिल्ली में रहें खावेंगे क्या
ज़ख़्म के भरने तलक नाख़ुन ना बढ़ जावेंगे क्या
हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
कोई मुझको ये तो समझा दो कि समझावेंगे क्या
'गर किया नासेह ने हमको क़ैद (अच्छा! यूँ सही)
ये जुनून-ए-इश्क़ के अंदाज़ छुट जावेंगे क्या
ख़ाना-ज़ाद-ए-ज़ुल्फ़ हैं, ज़ंजीर से भागेंगे क्यूँ
हैं गिरफ़्तार-ए-वफ़ा, ज़िंदाँ से घबरावेंगे क्या
हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
हमने ये माना कि दिल्ली में रहें खावेंगे क्या
⏱️ Synced Lyrics
[00:00.84] दोस्त ग़म-ख़्वारी में मेरी सई फ़रमावेंगे क्या
[00:14.28] ज़ख़्म के भरने तलक नाख़ुन ना बढ़ जावेंगे क्या
[00:24.78]
[00:30.64] हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
[00:43.63] हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
[00:55.44] कोई मुझको ये तो समझा दो कि समझावेंगे क्या
[01:08.21] 'गर किया नासेह ने हमको क़ैद (अच्छा! यूँ सही)
[01:17.49] ये जुनून-ए-इश्क़ के अंदाज़ छुट जावेंगे क्या
[01:25.80]
[01:32.18] ख़ाना-ज़ाद-ए-ज़ुल्फ़ हैं, ज़ंजीर से भागेंगे क्यूँ
[01:44.62] हैं गिरफ़्तार-ए-वफ़ा, ज़िंदाँ से घबरावेंगे क्या
[01:53.69]
[01:59.83] हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
[02:10.93] हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
[02:21.71] हमने ये माना कि दिल्ली में रहें खावेंगे क्या
[02:31.49]
[00:14.28] ज़ख़्म के भरने तलक नाख़ुन ना बढ़ जावेंगे क्या
[00:24.78]
[00:30.64] हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
[00:43.63] हज़रत-ए-नासेह 'गर आवें दीदा-ओ-दिल फर्श-ए-राह
[00:55.44] कोई मुझको ये तो समझा दो कि समझावेंगे क्या
[01:08.21] 'गर किया नासेह ने हमको क़ैद (अच्छा! यूँ सही)
[01:17.49] ये जुनून-ए-इश्क़ के अंदाज़ छुट जावेंगे क्या
[01:25.80]
[01:32.18] ख़ाना-ज़ाद-ए-ज़ुल्फ़ हैं, ज़ंजीर से भागेंगे क्यूँ
[01:44.62] हैं गिरफ़्तार-ए-वफ़ा, ज़िंदाँ से घबरावेंगे क्या
[01:53.69]
[01:59.83] हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
[02:10.93] हैं अब इस मामूरे में क़हत-ए-ग़म-ए-उलफ़त, असद
[02:21.71] हमने ये माना कि दिल्ली में रहें खावेंगे क्या
[02:31.49]