Chupke Se
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📜 Lyrics
दोस्तों से झू–, दोस्तों से झूठी-मूठी दूसरों का नाम लेके
फिर मेरी बातें करना (ग़ालिब)
यारा (ग़ालिब) रात से दिन करना (ग़ालिब)
लम्बी जुदाई तेरी, बड़ा मुश्किल है (ग़ालिब)
आहों से दिल भरना (ग़ालिब)
यारा (ग़ालिब) रात से दिन करना (ग़ालिब)
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
रोज़ सफ़र करना
यारा रात से दिन करना
चुपके से, चुपके से रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले
जले कतरा-कतरा, गले कतरा-कतरा
रात भी ना हिले आधी-आधी
रात भी ना हिले आधी-आधी ये
चुपके से लग जा गले रात के चादर तले
फरवरी की सर्दियों की धूप में
मूँदी-मूँदी अँखियों से देखना
हाथ की आड़ से निमी-निमी ठंड और आग में
हौले-हौले मारवा के राग में मीर की बात हो
दिन भी ना डूबे, रात ना आए
शाम कभी ना ढले
शाम ढले तो सुबह ना आए
रात ही रात चले
चुपके से, चुपके से रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले
दोस्तों से झूठी-मूठी (ग़ालिब) दूसरों का नाम लेके (ग़ालिब)
फिर मेरी बातें करना (ग़ालिब)
यारा (ग़ालिब) रात से दिन करना (ग़ालिब)
लम्बी (ग़ालिब) जुदाई तेरी, बड़ा मुश्किल है
आहों से दिल भरना
यारा रात से दिन करना
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
रोज़ सफ़र करना
यारा रात से दिन करना
तुझ बिना पगली पुरवई
तुझ बिना पगली पुरवई
आके मेरी चुनरी में भर गई
तू कभी ऐसे ही गले लगे जैसे ये पुरवई
आ गले लग जैसे ये पुरवई
साथिया सुन तो
कल जो मुझको नींद ना आए, पास बुला लेना
गोद में अपनी सर रख लेना, लोरी सुना देना
चुपके से लग जा गले रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले
जले कतरा-कतरा, गले कतरा-कतरा
रात भी ना हिले आधी-आधी
रात भी ना हिले आधी-आधी ये
चुपके से लग जा गले रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले
फिर मेरी बातें करना (ग़ालिब)
यारा (ग़ालिब) रात से दिन करना (ग़ालिब)
लम्बी जुदाई तेरी, बड़ा मुश्किल है (ग़ालिब)
आहों से दिल भरना (ग़ालिब)
यारा (ग़ालिब) रात से दिन करना (ग़ालिब)
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
रोज़ सफ़र करना
यारा रात से दिन करना
चुपके से, चुपके से रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले
जले कतरा-कतरा, गले कतरा-कतरा
रात भी ना हिले आधी-आधी
रात भी ना हिले आधी-आधी ये
चुपके से लग जा गले रात के चादर तले
फरवरी की सर्दियों की धूप में
मूँदी-मूँदी अँखियों से देखना
हाथ की आड़ से निमी-निमी ठंड और आग में
हौले-हौले मारवा के राग में मीर की बात हो
दिन भी ना डूबे, रात ना आए
शाम कभी ना ढले
शाम ढले तो सुबह ना आए
रात ही रात चले
चुपके से, चुपके से रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले
दोस्तों से झूठी-मूठी (ग़ालिब) दूसरों का नाम लेके (ग़ालिब)
फिर मेरी बातें करना (ग़ालिब)
यारा (ग़ालिब) रात से दिन करना (ग़ालिब)
लम्बी (ग़ालिब) जुदाई तेरी, बड़ा मुश्किल है
आहों से दिल भरना
यारा रात से दिन करना
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
कब ये पूरी होगी? दूर ये दूरी होगी
रोज़ सफ़र करना
यारा रात से दिन करना
तुझ बिना पगली पुरवई
तुझ बिना पगली पुरवई
आके मेरी चुनरी में भर गई
तू कभी ऐसे ही गले लगे जैसे ये पुरवई
आ गले लग जैसे ये पुरवई
साथिया सुन तो
कल जो मुझको नींद ना आए, पास बुला लेना
गोद में अपनी सर रख लेना, लोरी सुना देना
चुपके से लग जा गले रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले
जले कतरा-कतरा, गले कतरा-कतरा
रात भी ना हिले आधी-आधी
रात भी ना हिले आधी-आधी ये
चुपके से लग जा गले रात के चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे जले