Chingari Koi Bharke
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⏱️ 5:34 duration
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📜 Lyrics
किशोर दा जितने चुलबुले और मज़ाकिया थे
उतने ही serious और emotional भी
एक दिन कहने लगे, "कि मधुबाला
Tragedy King दिलीप कुमार को छोड़ के
मेरे पास आईं थी, Comedy King के पास
लेकिन अफ़सोस कि मेरी comedy भी उन्हें खुशी नहीं दे पाई"
Hmm, चिंगारी कोई भड़के...
चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए
सावन जो अगन लगाए, उसे कौन बुझाए?
हो, उसे कौन बुझाए?
पतझर जो बाग़ उजाड़े वो बाग़ बहार खिलाए
जो बाग़ बहार में उजड़े, उसे कौन खिलाए?
हो, उसे कौन खिलाए?
हम से मत पूछो, "कैसे मंदिर टूटा सपनों का?"
हम से मत पूछो, "कैसे मंदिर टूटा सपनों का?"
लोगों की बात नहीं है, ये क़िस्सा है अपनों का
कोई दुश्मन ठेस लगाए तो मीत जिया बहलाए
मनमीत जो घाव लगाए, उसे कौन मिटाए?
ना जाने क्या हो जाता, जाने हम क्या कर जाते
ना जाने क्या हो जाता, जाने हम क्या कर जाते
पीते हैं तो ज़िंदा हैं, ना पीते तो मर जाते
दुनिया जो प्यासा रखे तो मदिरा प्यास बुझाए
मदिरा जो प्यास लगाए, उसे कौन बुझाए?
हो, उसे कौन बुझाए?
माना, तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
माना, तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
मौजों का दोष नहीं है, ये दोष है और किसी का
मझधार में नय्या डोले तो माझी पार लगाए
माझी जो नाव डुबोए, उसे कौन बचाए?
हो, उसे कौन बचाए?
चिंगारी...
Hmm-hmm-hmm
Hmm-hmm-hmm
Hmm-hmm-hmm
उतने ही serious और emotional भी
एक दिन कहने लगे, "कि मधुबाला
Tragedy King दिलीप कुमार को छोड़ के
मेरे पास आईं थी, Comedy King के पास
लेकिन अफ़सोस कि मेरी comedy भी उन्हें खुशी नहीं दे पाई"
Hmm, चिंगारी कोई भड़के...
चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए
सावन जो अगन लगाए, उसे कौन बुझाए?
हो, उसे कौन बुझाए?
पतझर जो बाग़ उजाड़े वो बाग़ बहार खिलाए
जो बाग़ बहार में उजड़े, उसे कौन खिलाए?
हो, उसे कौन खिलाए?
हम से मत पूछो, "कैसे मंदिर टूटा सपनों का?"
हम से मत पूछो, "कैसे मंदिर टूटा सपनों का?"
लोगों की बात नहीं है, ये क़िस्सा है अपनों का
कोई दुश्मन ठेस लगाए तो मीत जिया बहलाए
मनमीत जो घाव लगाए, उसे कौन मिटाए?
ना जाने क्या हो जाता, जाने हम क्या कर जाते
ना जाने क्या हो जाता, जाने हम क्या कर जाते
पीते हैं तो ज़िंदा हैं, ना पीते तो मर जाते
दुनिया जो प्यासा रखे तो मदिरा प्यास बुझाए
मदिरा जो प्यास लगाए, उसे कौन बुझाए?
हो, उसे कौन बुझाए?
माना, तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
माना, तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
मौजों का दोष नहीं है, ये दोष है और किसी का
मझधार में नय्या डोले तो माझी पार लगाए
माझी जो नाव डुबोए, उसे कौन बचाए?
हो, उसे कौन बचाए?
चिंगारी...
Hmm-hmm-hmm
Hmm-hmm-hmm
Hmm-hmm-hmm