Lapata (feat. Savage)
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📜 Lyrics
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें
कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें
कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता...
आ...
तू लापता...
तू लापता
रोता देख कर मुझे वो भी रो गई
ये दुनिया मेरा मेला जिसमें तू खो गई
ट्रेन का सफर तवील और थकावट
कंधे पर अपना सर वो मेरे रख के सो गई
कंधे पे बोझ मैं इसे रोज लेना चाहता
कलाकार हो के भी मैं चेहरा पढ़ नहीं पाता
तनज़ीया है वो मैं बात कर ही नहीं पाता
लापता है तू, मैं तुझे ढूंढ भी नहीं पाता
ढूंढ भी नहीं पाता
तू लापता है, झूठे वादे ये क्या वफा है?
घर घर जा के मैं पूछूं तेरा, मुझे क्या पता के तेरा क्या पता है
दिल तोड़ने के तरीके से आदतें उससे, मांगता था दुआ कोई ना मांगे उसे
मसरूफ इतने होते हैं कि बात होती नहीं है
तेरी सालगिरह कभी मुझे याद होती नहीं है
तेरे दिल में रह रहे हैं सदियों से, अब तू कहाँ दिल रहा, वहीं का नहीं
अब तू मुझसे पूछती है तुम कहाँ के हो?
नहीं, नहीं, मैं कहता मैं कहीं का नहीं
तू बता क्यों तू लापता है?
ये तेरी क्या वफा, क्या दूँ सजा?
ये तूने क्या किया है?
तेरे इंतजार में काटी रातें, वो सारी बातें वो दिल में सही, वो
आरजू जो मिलने की तुझसे, वो ख्वाहिशें बन के अब दिल में रही
इस दुनिया के लिए तो मेहमान हूँ मैं, तेरे आप जनाब से अब बेजार हूँ मैं
जिस दिल से निकल कर तू जा बैठी बाजार में
, उसी बाजार की एक छोटी सी दुकान हूँ मैं
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता...
आ...
तू लापता, तू लापता
अब मैं लापता और ला मकान भी
मैं गुजरूं नहीं गली से तेरा मकान नहीं
आसान नहीं, एक उमर हमने काट दी
तुम पत्थर दिल और मेरी खुशियां सारी कांच की
तो चकनाचूर कैसे नहीं होंगी ये ख्वाहिशें
मौला, तूने लिखी क्या आजमाई है?
सोचा तो बहुत तेरे खत नहीं जलाए हैं
कितने गाने तुझ पर ऐसे लिख के मिटाए हैं
देख ही ना पाए हैं, जब खत्म हुआ राब्ता
वो हकीकत थी मेरी, या बस ख्वाब था
वो मिले मुझसे, हाल पूछे आज का, ख्वाहिशें के, मैं ख्वाब से ना जागता
क्या शिकवा करें, क्या रखें तुमसे गिला अब
वो जो नजरों से दूर हुआ वो मिला कब
मिला जब, जब डल चुकी थी गम ए शाम
ये लोग गम खरीदे मेरे, सरेआम
बड़े आम शहर में किस्से, बेवफाई के
ये मेरी उल्फत तुझे हश्र में गवाही दे
वो किस तरीके से, नजर ये मिलाएंगे
जब करोगे अहद-ए-वफा, हम याद बहुत आएंगे
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता...
आ...
तू लापता, तू लापता
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें
कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें
कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता...
आ...
तू लापता...
तू लापता
रोता देख कर मुझे वो भी रो गई
ये दुनिया मेरा मेला जिसमें तू खो गई
ट्रेन का सफर तवील और थकावट
कंधे पर अपना सर वो मेरे रख के सो गई
कंधे पे बोझ मैं इसे रोज लेना चाहता
कलाकार हो के भी मैं चेहरा पढ़ नहीं पाता
तनज़ीया है वो मैं बात कर ही नहीं पाता
लापता है तू, मैं तुझे ढूंढ भी नहीं पाता
ढूंढ भी नहीं पाता
तू लापता है, झूठे वादे ये क्या वफा है?
घर घर जा के मैं पूछूं तेरा, मुझे क्या पता के तेरा क्या पता है
दिल तोड़ने के तरीके से आदतें उससे, मांगता था दुआ कोई ना मांगे उसे
मसरूफ इतने होते हैं कि बात होती नहीं है
तेरी सालगिरह कभी मुझे याद होती नहीं है
तेरे दिल में रह रहे हैं सदियों से, अब तू कहाँ दिल रहा, वहीं का नहीं
अब तू मुझसे पूछती है तुम कहाँ के हो?
नहीं, नहीं, मैं कहता मैं कहीं का नहीं
तू बता क्यों तू लापता है?
ये तेरी क्या वफा, क्या दूँ सजा?
ये तूने क्या किया है?
तेरे इंतजार में काटी रातें, वो सारी बातें वो दिल में सही, वो
आरजू जो मिलने की तुझसे, वो ख्वाहिशें बन के अब दिल में रही
इस दुनिया के लिए तो मेहमान हूँ मैं, तेरे आप जनाब से अब बेजार हूँ मैं
जिस दिल से निकल कर तू जा बैठी बाजार में
, उसी बाजार की एक छोटी सी दुकान हूँ मैं
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता...
आ...
तू लापता, तू लापता
अब मैं लापता और ला मकान भी
मैं गुजरूं नहीं गली से तेरा मकान नहीं
आसान नहीं, एक उमर हमने काट दी
तुम पत्थर दिल और मेरी खुशियां सारी कांच की
तो चकनाचूर कैसे नहीं होंगी ये ख्वाहिशें
मौला, तूने लिखी क्या आजमाई है?
सोचा तो बहुत तेरे खत नहीं जलाए हैं
कितने गाने तुझ पर ऐसे लिख के मिटाए हैं
देख ही ना पाए हैं, जब खत्म हुआ राब्ता
वो हकीकत थी मेरी, या बस ख्वाब था
वो मिले मुझसे, हाल पूछे आज का, ख्वाहिशें के, मैं ख्वाब से ना जागता
क्या शिकवा करें, क्या रखें तुमसे गिला अब
वो जो नजरों से दूर हुआ वो मिला कब
मिला जब, जब डल चुकी थी गम ए शाम
ये लोग गम खरीदे मेरे, सरेआम
बड़े आम शहर में किस्से, बेवफाई के
ये मेरी उल्फत तुझे हश्र में गवाही दे
वो किस तरीके से, नजर ये मिलाएंगे
जब करोगे अहद-ए-वफा, हम याद बहुत आएंगे
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता
मेरी नजर में तू लापता, बैठी कोने में, तू है क्यों खफा?
ये, ये
तेरे दीदार को तरसती हैं ये आंखें, कौन हूँ मैं, ये मैं नहीं तू बता...
आ...
तू लापता, तू लापता