Kya Mohabbat Ka Yehi Anjaam Hai
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📜 Lyrics
दिल की गिरह खोल दो चूप ना बैठो, कोई गीत गाओ
महफील में अब कौन है अजनबी तुम मेरे पास आओ
मिलने दो अब दिल से दिल को मिटने दो मजबूरीयों को शीशे
में अपने डूबो दो सब फासलों दूरियों को आँखों में मैं मुस्कराऊं तुम्हारें जो तुम मुस्कुराओ
हम तुम ना हम तुम रहे अब कुछ और ही हो गये अब सपनों
के झिलमिल नगर में, जाने कहाँ खो गये अब हमराह पूछे
किसी से, ना तुम अपनी मंज़िल बताओ
कल हम से पूछे ना कोई क्या हो गया था तुम्हें कल मुड़कर
नहीं देखते हम दिल ने कहा है चला चल जो दूर पीछे कही रह
गये, अब उन्हें मत बुलाओ
महफील में अब कौन है अजनबी तुम मेरे पास आओ
मिलने दो अब दिल से दिल को मिटने दो मजबूरीयों को शीशे
में अपने डूबो दो सब फासलों दूरियों को आँखों में मैं मुस्कराऊं तुम्हारें जो तुम मुस्कुराओ
हम तुम ना हम तुम रहे अब कुछ और ही हो गये अब सपनों
के झिलमिल नगर में, जाने कहाँ खो गये अब हमराह पूछे
किसी से, ना तुम अपनी मंज़िल बताओ
कल हम से पूछे ना कोई क्या हो गया था तुम्हें कल मुड़कर
नहीं देखते हम दिल ने कहा है चला चल जो दूर पीछे कही रह
गये, अब उन्हें मत बुलाओ