Karta Hai Ek Rabi Dil Soz Ye Bayan. Pt. 2
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⏱️ 3:31 duration
🆔 ID: 4841750
📜 Lyrics
करता है एक रावी-ए-दिल-सोज़ ये बयाँ
रमज़ान के महीने की मशहूर दास्ताँ
मुल्क-ए-यमन में लड़का था एक आठ साल का
चर्चा था शहर-शहर में जिसके जमाल का
रोज़ा ख़ुदा के नाम पे रखने का शौक़ था
रमज़ान का जो चाँद नज़र उसको आ गया
कहने लगा ये माँ से के "रोज़ा रखूँगा मैं
मुझको जगाना रात को, तहरी करूँगा मैं"
बच्चे की बात का ना किया माँ ने कुछ ख़याल
लड़का जो सुबह उठा तो उसको हुआ मलाल
समझाया माँ ने, "ऐ मेरे दिलबर, ना कर मलाल
रोज़ा नहीं है फ़र्ज़ अभी तुझपे, मेरे लाल"
मासूम दिल पे ठेस लगी, माँ से यूँ कहा
"अम्मी, सुनो, ये कहता है क़ुरआन में ख़ुदा
रोज़े की भूख-प्यास का जो ग़म उठाएगा
उस रोज़ा-दार को ना जहन्नुम जलाएगा"
क़ुरआन का नुज़ूल इसी माह में हुआ
तौबा क़ुबूल करता है इस माह में ख़ुदा
अल-क़िस्सा रात आई तो वो जागता रहा
कहना किसी का कुछ ना सुना, रोज़ा रख लिया
सहरी वो करके सो गया और सोके जब उठा
बेटे का माथा चूम के मादर ने ये कहा
"रोज़ा ना रख सकेगा, तू ज़िद अपनी छोड़ दे
दे दूँगी अपना रोज़ा तुझे, रोज़ा तोड़ दे"
लड़का ये बोला, "खाना मैं हरगिज़ ना खाऊँगा
अपने ख़ुदा-ए-पाक को क्या मुँह दिखाऊँगा?"
दोपहर ढल के अस्र का जब वक़्त आ गया
पानी बग़ैर प्यास से ख़ुश्क हो गया गला
सीने में साँस रुक गई, चक्कर सा आ गया
कमसिन था, नाज़नीन था, चकरा के गिर पड़ा
रमज़ान के महीने की मशहूर दास्ताँ
मुल्क-ए-यमन में लड़का था एक आठ साल का
चर्चा था शहर-शहर में जिसके जमाल का
रोज़ा ख़ुदा के नाम पे रखने का शौक़ था
रमज़ान का जो चाँद नज़र उसको आ गया
कहने लगा ये माँ से के "रोज़ा रखूँगा मैं
मुझको जगाना रात को, तहरी करूँगा मैं"
बच्चे की बात का ना किया माँ ने कुछ ख़याल
लड़का जो सुबह उठा तो उसको हुआ मलाल
समझाया माँ ने, "ऐ मेरे दिलबर, ना कर मलाल
रोज़ा नहीं है फ़र्ज़ अभी तुझपे, मेरे लाल"
मासूम दिल पे ठेस लगी, माँ से यूँ कहा
"अम्मी, सुनो, ये कहता है क़ुरआन में ख़ुदा
रोज़े की भूख-प्यास का जो ग़म उठाएगा
उस रोज़ा-दार को ना जहन्नुम जलाएगा"
क़ुरआन का नुज़ूल इसी माह में हुआ
तौबा क़ुबूल करता है इस माह में ख़ुदा
अल-क़िस्सा रात आई तो वो जागता रहा
कहना किसी का कुछ ना सुना, रोज़ा रख लिया
सहरी वो करके सो गया और सोके जब उठा
बेटे का माथा चूम के मादर ने ये कहा
"रोज़ा ना रख सकेगा, तू ज़िद अपनी छोड़ दे
दे दूँगी अपना रोज़ा तुझे, रोज़ा तोड़ दे"
लड़का ये बोला, "खाना मैं हरगिज़ ना खाऊँगा
अपने ख़ुदा-ए-पाक को क्या मुँह दिखाऊँगा?"
दोपहर ढल के अस्र का जब वक़्त आ गया
पानी बग़ैर प्यास से ख़ुश्क हो गया गला
सीने में साँस रुक गई, चक्कर सा आ गया
कमसिन था, नाज़नीन था, चकरा के गिर पड़ा
⏱️ Synced Lyrics
[00:03.47] करता है एक रावी-ए-दिल-सोज़ ये बयाँ
[00:08.84] रमज़ान के महीने की मशहूर दास्ताँ
[00:17.06] मुल्क-ए-यमन में लड़का था एक आठ साल का
[00:23.75] चर्चा था शहर-शहर में जिसके जमाल का
[00:31.84] रोज़ा ख़ुदा के नाम पे रखने का शौक़ था
[00:37.21] रमज़ान का जो चाँद नज़र उसको आ गया
[00:45.26] कहने लगा ये माँ से के "रोज़ा रखूँगा मैं
[00:51.91] मुझको जगाना रात को, तहरी करूँगा मैं"
[00:59.97] बच्चे की बात का ना किया माँ ने कुछ ख़याल
[01:05.43] लड़का जो सुबह उठा तो उसको हुआ मलाल
[01:13.18] समझाया माँ ने, "ऐ मेरे दिलबर, ना कर मलाल
[01:19.81] रोज़ा नहीं है फ़र्ज़ अभी तुझपे, मेरे लाल"
[01:27.94] मासूम दिल पे ठेस लगी, माँ से यूँ कहा
[01:33.02] "अम्मी, सुनो, ये कहता है क़ुरआन में ख़ुदा
[01:41.01] रोज़े की भूख-प्यास का जो ग़म उठाएगा
[01:47.56] उस रोज़ा-दार को ना जहन्नुम जलाएगा"
[01:55.56] क़ुरआन का नुज़ूल इसी माह में हुआ
[02:00.65] तौबा क़ुबूल करता है इस माह में ख़ुदा
[02:08.71] अल-क़िस्सा रात आई तो वो जागता रहा
[02:15.17] कहना किसी का कुछ ना सुना, रोज़ा रख लिया
[02:23.43] सहरी वो करके सो गया और सोके जब उठा
[02:28.59] बेटे का माथा चूम के मादर ने ये कहा
[02:36.33] "रोज़ा ना रख सकेगा, तू ज़िद अपनी छोड़ दे
[02:43.12] दे दूँगी अपना रोज़ा तुझे, रोज़ा तोड़ दे"
[02:51.17] लड़का ये बोला, "खाना मैं हरगिज़ ना खाऊँगा
[02:56.29] अपने ख़ुदा-ए-पाक को क्या मुँह दिखाऊँगा?"
[03:04.30] दोपहर ढल के अस्र का जब वक़्त आ गया
[03:10.71] पानी बग़ैर प्यास से ख़ुश्क हो गया गला
[03:18.52] सीने में साँस रुक गई, चक्कर सा आ गया
[03:23.42] कमसिन था, नाज़नीन था, चकरा के गिर पड़ा
[03:29.30]
[00:08.84] रमज़ान के महीने की मशहूर दास्ताँ
[00:17.06] मुल्क-ए-यमन में लड़का था एक आठ साल का
[00:23.75] चर्चा था शहर-शहर में जिसके जमाल का
[00:31.84] रोज़ा ख़ुदा के नाम पे रखने का शौक़ था
[00:37.21] रमज़ान का जो चाँद नज़र उसको आ गया
[00:45.26] कहने लगा ये माँ से के "रोज़ा रखूँगा मैं
[00:51.91] मुझको जगाना रात को, तहरी करूँगा मैं"
[00:59.97] बच्चे की बात का ना किया माँ ने कुछ ख़याल
[01:05.43] लड़का जो सुबह उठा तो उसको हुआ मलाल
[01:13.18] समझाया माँ ने, "ऐ मेरे दिलबर, ना कर मलाल
[01:19.81] रोज़ा नहीं है फ़र्ज़ अभी तुझपे, मेरे लाल"
[01:27.94] मासूम दिल पे ठेस लगी, माँ से यूँ कहा
[01:33.02] "अम्मी, सुनो, ये कहता है क़ुरआन में ख़ुदा
[01:41.01] रोज़े की भूख-प्यास का जो ग़म उठाएगा
[01:47.56] उस रोज़ा-दार को ना जहन्नुम जलाएगा"
[01:55.56] क़ुरआन का नुज़ूल इसी माह में हुआ
[02:00.65] तौबा क़ुबूल करता है इस माह में ख़ुदा
[02:08.71] अल-क़िस्सा रात आई तो वो जागता रहा
[02:15.17] कहना किसी का कुछ ना सुना, रोज़ा रख लिया
[02:23.43] सहरी वो करके सो गया और सोके जब उठा
[02:28.59] बेटे का माथा चूम के मादर ने ये कहा
[02:36.33] "रोज़ा ना रख सकेगा, तू ज़िद अपनी छोड़ दे
[02:43.12] दे दूँगी अपना रोज़ा तुझे, रोज़ा तोड़ दे"
[02:51.17] लड़का ये बोला, "खाना मैं हरगिज़ ना खाऊँगा
[02:56.29] अपने ख़ुदा-ए-पाक को क्या मुँह दिखाऊँगा?"
[03:04.30] दोपहर ढल के अस्र का जब वक़्त आ गया
[03:10.71] पानी बग़ैर प्यास से ख़ुश्क हो गया गला
[03:18.52] सीने में साँस रुक गई, चक्कर सा आ गया
[03:23.42] कमसिन था, नाज़नीन था, चकरा के गिर पड़ा
[03:29.30]