Apne Haathon Ko Pehchan Murakh
🎵 2427 characters
⏱️ 3:05 duration
🆔 ID: 4841787
📜 Lyrics
अपने हाथों को पहचान
अपने हाथों को पहचान
मूरख इनमें है भगवान
मुझ पर, तुझ पर, सब पर ही पर
इन दो हाथों का एहसान
अपने हाथों को पहचान
हाथ उठाते हैं जो कुदाल, पर्वत काट गिराते हैं
बढ़ते-चढ़ते पानी में, बाँध के बंद दिखाते है
जंगल से खेतों की तरफ़ मोड़ के दरिया लाते हैं
अपने हाथों को पहचान
चुटकी-भर दाना लेकर ये तो ज़मीं में बिखराएँ
जितने तारे चमकते हैं उतने ही पौधे उग आएँ
भूख जहाँ तक देख सके, खेत वहाँ तक लहराएँ
अपने हाथों को पहचान
तूने गाढ़े ईटों से हाथों का है याराना
रख के नींव ये धरती में, छत को गगन दे नज़राना
बसता जाए शहर नया, सजता जाए वीराना
अपने हाथों को पहचान
छेनी और हथौड़ी का खेल अगर ये दिखलाएँ
तुभरे चेहरे पत्थर में, देवी-देवता मुस्काएँ
चमके-दमके ताज महल, ताज महल, ताज महल
चंद-सितारे शरमाएँ
अपने हाथों को पहचान
चाक चले इन हाथों से पहिया जैसे जीवन का
आँख झपकते लग जाए मेला कोरे बर्तन का
हाथों के छू लेने से सोना बनता है ज़ेवर
रूप को चमका देते हैं कंगन, झुमके और झूमर
बीन, सरंगी, तबला, ढोल, सबकुछ हाथ बनाते हैं
तारों में आवाज़ कहाँ, हाथ हमारे गाते हैं
अपने हाथों को पहचान
मूरख इनमें है भगवान
मुझ पर, तुझ पर, सब पर ही पर
इन दो हाथों का एहसान
अपने हाथों को पहचान
हाथ उठाते हैं जो कुदाल, पर्वत काट गिराते हैं
बढ़ते-चढ़ते पानी में, बाँध के बंद दिखाते है
जंगल से खेतों की तरफ़ मोड़ के दरिया लाते हैं
अपने हाथों को पहचान
चुटकी-भर दाना लेकर ये तो ज़मीं में बिखराएँ
जितने तारे चमकते हैं उतने ही पौधे उग आएँ
भूख जहाँ तक देख सके, खेत वहाँ तक लहराएँ
अपने हाथों को पहचान
तूने गाढ़े ईटों से हाथों का है याराना
रख के नींव ये धरती में, छत को गगन दे नज़राना
बसता जाए शहर नया, सजता जाए वीराना
अपने हाथों को पहचान
छेनी और हथौड़ी का खेल अगर ये दिखलाएँ
तुभरे चेहरे पत्थर में, देवी-देवता मुस्काएँ
चमके-दमके ताज महल, ताज महल, ताज महल
चंद-सितारे शरमाएँ
अपने हाथों को पहचान
चाक चले इन हाथों से पहिया जैसे जीवन का
आँख झपकते लग जाए मेला कोरे बर्तन का
हाथों के छू लेने से सोना बनता है ज़ेवर
रूप को चमका देते हैं कंगन, झुमके और झूमर
बीन, सरंगी, तबला, ढोल, सबकुछ हाथ बनाते हैं
तारों में आवाज़ कहाँ, हाथ हमारे गाते हैं
⏱️ Synced Lyrics
[00:11.64] अपने हाथों को पहचान
[00:16.62] अपने हाथों को पहचान
[00:19.38] मूरख इनमें है भगवान
[00:21.51] मुझ पर, तुझ पर, सब पर ही पर
[00:24.05] इन दो हाथों का एहसान
[00:26.48] अपने हाथों को पहचान
[00:31.23] हाथ उठाते हैं जो कुदाल, पर्वत काट गिराते हैं
[00:36.30] बढ़ते-चढ़ते पानी में, बाँध के बंद दिखाते है
[00:41.25] जंगल से खेतों की तरफ़ मोड़ के दरिया लाते हैं
[00:46.06] अपने हाथों को पहचान
[00:50.91] चुटकी-भर दाना लेकर ये तो ज़मीं में बिखराएँ
[00:55.88] जितने तारे चमकते हैं उतने ही पौधे उग आएँ
[01:05.57] भूख जहाँ तक देख सके, खेत वहाँ तक लहराएँ
[01:10.69] अपने हाथों को पहचान
[01:15.31] तूने गाढ़े ईटों से हाथों का है याराना
[01:20.50] रख के नींव ये धरती में, छत को गगन दे नज़राना
[01:25.32] बसता जाए शहर नया, सजता जाए वीराना
[01:30.29] अपने हाथों को पहचान
[01:35.16] छेनी और हथौड़ी का खेल अगर ये दिखलाएँ
[01:40.12] तुभरे चेहरे पत्थर में, देवी-देवता मुस्काएँ
[01:44.83] चमके-दमके ताज महल, ताज महल, ताज महल
[01:56.05] चंद-सितारे शरमाएँ
[01:58.50] अपने हाथों को पहचान
[02:03.31] चाक चले इन हाथों से पहिया जैसे जीवन का
[02:08.14] आँख झपकते लग जाए मेला कोरे बर्तन का
[02:13.00] हाथों के छू लेने से सोना बनता है ज़ेवर
[02:17.74] रूप को चमका देते हैं कंगन, झुमके और झूमर
[02:22.73] बीन, सरंगी, तबला, ढोल, सबकुछ हाथ बनाते हैं
[02:27.37] तारों में आवाज़ कहाँ, हाथ हमारे गाते हैं
[02:34.41]
[00:16.62] अपने हाथों को पहचान
[00:19.38] मूरख इनमें है भगवान
[00:21.51] मुझ पर, तुझ पर, सब पर ही पर
[00:24.05] इन दो हाथों का एहसान
[00:26.48] अपने हाथों को पहचान
[00:31.23] हाथ उठाते हैं जो कुदाल, पर्वत काट गिराते हैं
[00:36.30] बढ़ते-चढ़ते पानी में, बाँध के बंद दिखाते है
[00:41.25] जंगल से खेतों की तरफ़ मोड़ के दरिया लाते हैं
[00:46.06] अपने हाथों को पहचान
[00:50.91] चुटकी-भर दाना लेकर ये तो ज़मीं में बिखराएँ
[00:55.88] जितने तारे चमकते हैं उतने ही पौधे उग आएँ
[01:05.57] भूख जहाँ तक देख सके, खेत वहाँ तक लहराएँ
[01:10.69] अपने हाथों को पहचान
[01:15.31] तूने गाढ़े ईटों से हाथों का है याराना
[01:20.50] रख के नींव ये धरती में, छत को गगन दे नज़राना
[01:25.32] बसता जाए शहर नया, सजता जाए वीराना
[01:30.29] अपने हाथों को पहचान
[01:35.16] छेनी और हथौड़ी का खेल अगर ये दिखलाएँ
[01:40.12] तुभरे चेहरे पत्थर में, देवी-देवता मुस्काएँ
[01:44.83] चमके-दमके ताज महल, ताज महल, ताज महल
[01:56.05] चंद-सितारे शरमाएँ
[01:58.50] अपने हाथों को पहचान
[02:03.31] चाक चले इन हाथों से पहिया जैसे जीवन का
[02:08.14] आँख झपकते लग जाए मेला कोरे बर्तन का
[02:13.00] हाथों के छू लेने से सोना बनता है ज़ेवर
[02:17.74] रूप को चमका देते हैं कंगन, झुमके और झूमर
[02:22.73] बीन, सरंगी, तबला, ढोल, सबकुछ हाथ बनाते हैं
[02:27.37] तारों में आवाज़ कहाँ, हाथ हमारे गाते हैं
[02:34.41]