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Chehra Chhupa Liya

👤 Asha Bhosle, Salma Agha & Mahendra Kapoor 🎼 Sufis At The Cinema - 50 years Of Bollywood Qawwali and Sufi Song 1958 - 2007 ⏱️ 8:36
🎵 5797 characters
⏱️ 8:36 duration
🆔 ID: 4892837

📜 Lyrics

चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में

(चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में)
हाँ, चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में
अरे, जी चाहता है आग लगा दूँ नक़ाब में
(जी चाहता है आग लगा दूँ नक़ाब में)

बिजली थी इक जो हम ने छुपा ली नक़ाब में
अरे, लग जाती वरना आग तुम्हारे शबाब में
(लग जाती वरना आग तुम्हारे शबाब में)

हम हुस्न के परवाने, जलने से नहीं डरते
(हम हुस्न के परवाने, जलने से नहीं डरते)
अंजाम-ए-मोहब्बत की परवाह नहीं करते
(अंजाम-ए-मोहब्बत की परवाह नहीं करते)

एक बार ही देते हैं दिल अपना हसीनों को
एक बार ही मरते हैं, १०० बार नहीं मरते
(एक बार ही मरते हैं, १०० बार नहीं मरते)

परवाने से पहले जली और परवाने के साथ जली
वो तो जला बस पल-दो-पल को, शम्मा तो सारी रात जली

एक परवाना जला, इस क़दर शोर मचा
शम्मा चुप-चाप जली, लब पे शिकवा ना गिला
क्या है जलने का मज़ा, हुस्न से पूछो ज़रा

क्योंकि परवाने को जल जाना, हम ने ही सिखाया है
(परवाने को जल जाना, हम ने ही सिखाया है)
वो तब ही जला, हम ने जब ख़ुद को जलाया है
(वो तब ही जला, हम ने जब ख़ुद को जलाया है)

आशिक़ की जान इश्क़ में जाने से पेशतर
अरे, ख़ुद हुस्न डूबता है वफ़ा के चनाब में
(ख़ुद हुस्न डूबता है वफ़ा के चनाब में)
(चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में)

'गर हुस्न नहीं होता, ये इश्क़ कहाँ होता
('गर हुस्न नहीं होता, ये इश्क़ कहाँ होता)
फिर किस से वफ़ा करते? फिर किस का बयाँ होता?
(फिर किस से वफ़ा करते? फिर किस का बयाँ होता?)

तकरार से क्या हासिल, कुछ भी ना हुआ होता
(तकरार से क्या हासिल, कुछ भी ना हुआ होता)
तकरार से क्या हासिल, कुछ भी ना हुआ होता
'गर तुम ना हसीं होते, 'गर मैं ना जवाँ होता
('गर तुम ना हसीं होते, 'गर मैं ना जवाँ होता)

जिस रोज़ से इस हुस्न का दीदार किया है
बस प्यार किया, प्यार किया, प्यार किया है
ये झूठ है कि तुम ने हमें प्यार किया है
हम ने तुम्हें ज़ुल्फ़ों में गिरफ़्तार किया है
(हम ने तुम्हें ज़ुल्फ़ों में गिरफ़्तार किया है)

तुम हुस्न हो, हम इश्क़ हैं, 'गर तुम नहीं तो हम नहीं
है बात सच्ची बस यही, कोई किसी से कम नहीं
है बात सच्ची बस यही, कोई किसी से कम नहीं
एक नग़्मा है, एक राग है, दोनों तरफ़ एक आग है
तुम से हमें शिकवा भी है, फिर भी तुम्हीं से प्यार है
तुम बिन हमें कब चैन है, हम को भी ये इक़रार है

देखे तो होश गुम हो, ना देखे तो होश गुम
अरे, ये फँस गई है जान मेरी किस अज़ाब में?
(ये फँस गई है जान मेरी किस अज़ाब में?)
(चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में)

हो, बिजली थी इक जो हम ने छुपा ली नक़ाब में
लग जाती वरना आग तुम्हारे शबाब में
(लग जाती वरना आग तुम्हारे शबाब में)
(चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में)

लग जाती वरना आग तुम्हारे शबाब में
(लग जाती वरना आग तुम्हारे शबाब में)

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