Jab Mila Tu
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⏱️ 4:12 duration
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📜 Lyrics
जैसे घडी के गिरह से
वक़्त कहीं पे गिरा हो
जैसे रौशनी सुबह से
हो जाये जुदा
जैसे गाने और नज़म से
सुर कोई चुराले
वैसे आधा अधूरा मैं हूँ तेरे बिना
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू ऋतु रु तू रु तू
खाली जो रात हो
मैं खवाबों चाँद तारों से
वह पूरी भर दूँ
तेरी जो बात हो
मैं बिन कहे ही
आधी पौनी पूरी कर दूँ
जो अशे से हम हैं
वह पूरे हो तुमसे
न जाने है सौदा भी कब थे हवाई
अधूरे से किस्से बराबर के हिस्से
तू दिल में तो में दुआ
जब मिला तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू रु तू रु तुरु तू
कल तू जो खोयी हो, तो गुमशुदा
यह ज़िन्दगी बसर कर दूं
मंज़िल जो सोयी हो
तो ख्वाब सारे
तेरे ही नज़र कर दूं
तो आधे से दिल को
जो लाएगी भी तो
मैं सौ ख्वाइशों से ही भर दूंगा वो
करे न यकीन तू
अभी के अभी तू
तो आगे आज़मा
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू
जैसे घडी के गिरह से
वक़्त कहीं पे गिरा हो
जैसे रौशनी सुबह से
हो जाये जुदा
जैसे गाने और नज़म से
सुर कोई चुराले
वैसे आधा अधूरा मैं हूँ तेरे बिना
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू ऋतु रु तू रु तू
वक़्त कहीं पे गिरा हो
जैसे रौशनी सुबह से
हो जाये जुदा
जैसे गाने और नज़म से
सुर कोई चुराले
वैसे आधा अधूरा मैं हूँ तेरे बिना
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू ऋतु रु तू रु तू
खाली जो रात हो
मैं खवाबों चाँद तारों से
वह पूरी भर दूँ
तेरी जो बात हो
मैं बिन कहे ही
आधी पौनी पूरी कर दूँ
जो अशे से हम हैं
वह पूरे हो तुमसे
न जाने है सौदा भी कब थे हवाई
अधूरे से किस्से बराबर के हिस्से
तू दिल में तो में दुआ
जब मिला तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू रु तू रु तुरु तू
कल तू जो खोयी हो, तो गुमशुदा
यह ज़िन्दगी बसर कर दूं
मंज़िल जो सोयी हो
तो ख्वाब सारे
तेरे ही नज़र कर दूं
तो आधे से दिल को
जो लाएगी भी तो
मैं सौ ख्वाइशों से ही भर दूंगा वो
करे न यकीन तू
अभी के अभी तू
तो आगे आज़मा
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू
जैसे घडी के गिरह से
वक़्त कहीं पे गिरा हो
जैसे रौशनी सुबह से
हो जाये जुदा
जैसे गाने और नज़म से
सुर कोई चुराले
वैसे आधा अधूरा मैं हूँ तेरे बिना
जब मिला तू रु तू रु तू रु तू रु तू
न थी कमी न जुस्तजू रु तू रु तू
और आधे आधे पल हुए फिर पूरे यूँ
जब मिला तू रु तू ऋतु रु तू रु तू