Kal Raat Zindagi Se Mulaqat Ho Gayi
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⏱️ 6:00 duration
🆔 ID: 6254453
📜 Lyrics
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
१ हुस्न सामने था क़यामत के रूप में
१ ख्वाब जलवागर था हकीकत के रूप में
चेहरा वाही गुलाब की रंगत लिए हुए
नज़रे वाही पयाम-ए-मुहब्बत लिए हुए
जुल्फें वोही की जैसे धुन्धलका हो शाम का
आँखें वोही जिन आँखों पे धोखा हो जाम का
कुछ देर को तसल्ली-ए-जज़्बात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
देखा उसे तो दामन-ए-रुक्सार नम भी था
वल्लाह उसके दिल को कुछ एहसास-ए-ग़म भी था
थे उसकी हसरतों के खज़ाने लूटे हुए
लब पर तड़प रहे थे फ़साने घुटे हुए
कांटे चुभे हुए थे सिसकती उमंग में
डूबी हुई थी फिर भी वो वफ़ाओं के रंग में
दम भर को खत्म गर्दिश-ए-हालात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
ए मेरी रूह-ए-इश्क़, मेरी जान-ए-शायरी
दिल मानता नही की तू मुझसे बिछड़ गई
मायूसियाँ है फिर भी मेरे दिल को आस है
मेहसूस हो रहा है के तू मेरे पास है
समझाऊँ किस तरह से दिल-ए-बेक़रार को
वापस कहाँ से लाऊँ मैं गुज़री बहार को
मजबूर दिल के साथ बड़ी घात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
१ हुस्न सामने था क़यामत के रूप में
१ ख्वाब जलवागर था हकीकत के रूप में
चेहरा वाही गुलाब की रंगत लिए हुए
नज़रे वाही पयाम-ए-मुहब्बत लिए हुए
जुल्फें वोही की जैसे धुन्धलका हो शाम का
आँखें वोही जिन आँखों पे धोखा हो जाम का
कुछ देर को तसल्ली-ए-जज़्बात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
देखा उसे तो दामन-ए-रुक्सार नम भी था
वल्लाह उसके दिल को कुछ एहसास-ए-ग़म भी था
थे उसकी हसरतों के खज़ाने लूटे हुए
लब पर तड़प रहे थे फ़साने घुटे हुए
कांटे चुभे हुए थे सिसकती उमंग में
डूबी हुई थी फिर भी वो वफ़ाओं के रंग में
दम भर को खत्म गर्दिश-ए-हालात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
ए मेरी रूह-ए-इश्क़, मेरी जान-ए-शायरी
दिल मानता नही की तू मुझसे बिछड़ गई
मायूसियाँ है फिर भी मेरे दिल को आस है
मेहसूस हो रहा है के तू मेरे पास है
समझाऊँ किस तरह से दिल-ए-बेक़रार को
वापस कहाँ से लाऊँ मैं गुज़री बहार को
मजबूर दिल के साथ बड़ी घात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
⏱️ Synced Lyrics
[00:09.46] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[00:20.54] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[00:31.56] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[00:42.34] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[00:55.70] १ हुस्न सामने था क़यामत के रूप में
[01:06.66] १ ख्वाब जलवागर था हकीकत के रूप में
[01:17.57] चेहरा वाही गुलाब की रंगत लिए हुए
[01:28.22] नज़रे वाही पयाम-ए-मुहब्बत लिए हुए
[01:39.29] जुल्फें वोही की जैसे धुन्धलका हो शाम का
[01:49.86] आँखें वोही जिन आँखों पे धोखा हो जाम का
[02:00.71] कुछ देर को तसल्ली-ए-जज़्बात हो गई
[02:11.64] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[02:22.02] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[02:36.07] देखा उसे तो दामन-ए-रुक्सार नम भी था
[02:46.99] वल्लाह उसके दिल को कुछ एहसास-ए-ग़म भी था
[02:57.79] थे उसकी हसरतों के खज़ाने लूटे हुए
[03:08.69] लब पर तड़प रहे थे फ़साने घुटे हुए
[03:19.53] कांटे चुभे हुए थे सिसकती उमंग में
[03:30.43] डूबी हुई थी फिर भी वो वफ़ाओं के रंग में
[03:41.39] दम भर को खत्म गर्दिश-ए-हालात हो गई
[03:51.96] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[04:02.65] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[04:15.90] ए मेरी रूह-ए-इश्क़, मेरी जान-ए-शायरी
[04:27.19] दिल मानता नही की तू मुझसे बिछड़ गई
[04:37.52] मायूसियाँ है फिर भी मेरे दिल को आस है
[04:48.69] मेहसूस हो रहा है के तू मेरे पास है
[04:59.36] समझाऊँ किस तरह से दिल-ए-बेक़रार को
[05:10.12] वापस कहाँ से लाऊँ मैं गुज़री बहार को
[05:20.62] मजबूर दिल के साथ बड़ी घात हो गई
[05:31.62] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[05:42.40] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[05:51.97]
[00:20.54] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[00:31.56] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[00:42.34] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[00:55.70] १ हुस्न सामने था क़यामत के रूप में
[01:06.66] १ ख्वाब जलवागर था हकीकत के रूप में
[01:17.57] चेहरा वाही गुलाब की रंगत लिए हुए
[01:28.22] नज़रे वाही पयाम-ए-मुहब्बत लिए हुए
[01:39.29] जुल्फें वोही की जैसे धुन्धलका हो शाम का
[01:49.86] आँखें वोही जिन आँखों पे धोखा हो जाम का
[02:00.71] कुछ देर को तसल्ली-ए-जज़्बात हो गई
[02:11.64] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[02:22.02] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[02:36.07] देखा उसे तो दामन-ए-रुक्सार नम भी था
[02:46.99] वल्लाह उसके दिल को कुछ एहसास-ए-ग़म भी था
[02:57.79] थे उसकी हसरतों के खज़ाने लूटे हुए
[03:08.69] लब पर तड़प रहे थे फ़साने घुटे हुए
[03:19.53] कांटे चुभे हुए थे सिसकती उमंग में
[03:30.43] डूबी हुई थी फिर भी वो वफ़ाओं के रंग में
[03:41.39] दम भर को खत्म गर्दिश-ए-हालात हो गई
[03:51.96] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[04:02.65] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[04:15.90] ए मेरी रूह-ए-इश्क़, मेरी जान-ए-शायरी
[04:27.19] दिल मानता नही की तू मुझसे बिछड़ गई
[04:37.52] मायूसियाँ है फिर भी मेरे दिल को आस है
[04:48.69] मेहसूस हो रहा है के तू मेरे पास है
[04:59.36] समझाऊँ किस तरह से दिल-ए-बेक़रार को
[05:10.12] वापस कहाँ से लाऊँ मैं गुज़री बहार को
[05:20.62] मजबूर दिल के साथ बड़ी घात हो गई
[05:31.62] लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई
[05:42.40] कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
[05:51.97]