Dhaaga
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⏱️ 3:41 duration
🆔 ID: 6670510
📜 Lyrics
आजकल
ये धागा तेरा मेरा क्यूँ ना जुड़ सके
आजकल
मैं चाहता नि की किसी का भी दिल दुखे
तो फिर आज कल
क्यूँ बाते होती फीकी तेरे मेरे बीच
तभी आजकल
यह धागा तेरा मेरा नही जुड़ सके
तेरे आने के बाद से
ना दिखा था कोई
तेरे जाने की खबर को सुन्ँके कैसे ही अपनाए कोई
तू बाते बनाए
मैं करू मनाए
और कबतक मनाए
जो तू ना माने
कोशिशें ये जारी क्यूंकी
रोता जब थी तू सिरहाने
तुमसे कहना चाहता पर ये दिल क्यूँ चुप रहा
जाने कितने चेहरों के पीछे यह च्छूप रहा
तुम आती लेने मुझको लहरों के किनारो पर
पर क्या करे ये दिल समंदर बीच ही फस चुका
अब बातें अधूरी
यह दिल कहना चाहे
रातें वो पूरी
जो मिल ही ना पाए
तुमसे वाफाओं
की ना है उम्मीद
इन धागों को अब ना
हम देते है ढील
आजकल
ये धागा तेरा मेरा क्यूँ ना जुड़ सके
आजकल
मैं चाहता नि की किसी का भी दिल दुखे
तो फिर आज कल
क्यूँ बाते होती फीकी तेरे मेरे बीच
तभी आजकल
यह धागा तेरा मेरा नही जुड़ सके
लिपटा है दिल मेरा धागों से, धड़के वो तेरे इशारो पे
पर हूमें फिकर की धागों के, दाग ना हो तेरे हाथों पे
हम दोनो में दूरियाँ काफ़ी
अब भूल चुके क्या तुम कैसा वो नाता था
ऐसा एक वादा था रिश्ता यह जन्मों का
सदियों का, छिड़ है अब वादों से
यह चाँदी अब मिट्टी में मिलने तक, यादों में तेरा बसेरा रहेगा
नज़रों में यादें झलकने पर आँसू बहेंगे तो दिल क्या करेगा
हूमें क्या वो धागे तो टूट चुके है जो दिल से जुड़ी थी
तुमसे खुशी थी अब तुमसे ही दर्द है, धागों का किस्सा बचेगा
तुझ बिन क्या करेगा, यह साँसें भी चलती थी तेरे ही कहने पर
काश मोहब्बत ही होती बस तुमसे, जुदाई के दर्द मैं से लेता
मैं कह देता काफ़ी आसानी से फिर ना मिलेंगे, मैं था तेरे लायक नही
पर यह रिश्ता था बढ़कर हम दोनो से
टुकड़े उन धागों के बिखरे अब शायद कही
आजकल
ये धागा तेरा मेरा क्यूँ ना जुड़ सके
आजकल
मैं चाहता नि की किसी का भी दिल दुखे
तो फिर आज कल
क्यूँ बाते होती फीकी तेरे मेरे बीच
तभी आजकल
यह धागा तेरा मेरा नही जुड़ सके
ये धागा तेरा मेरा क्यूँ ना जुड़ सके
आजकल
मैं चाहता नि की किसी का भी दिल दुखे
तो फिर आज कल
क्यूँ बाते होती फीकी तेरे मेरे बीच
तभी आजकल
यह धागा तेरा मेरा नही जुड़ सके
तेरे आने के बाद से
ना दिखा था कोई
तेरे जाने की खबर को सुन्ँके कैसे ही अपनाए कोई
तू बाते बनाए
मैं करू मनाए
और कबतक मनाए
जो तू ना माने
कोशिशें ये जारी क्यूंकी
रोता जब थी तू सिरहाने
तुमसे कहना चाहता पर ये दिल क्यूँ चुप रहा
जाने कितने चेहरों के पीछे यह च्छूप रहा
तुम आती लेने मुझको लहरों के किनारो पर
पर क्या करे ये दिल समंदर बीच ही फस चुका
अब बातें अधूरी
यह दिल कहना चाहे
रातें वो पूरी
जो मिल ही ना पाए
तुमसे वाफाओं
की ना है उम्मीद
इन धागों को अब ना
हम देते है ढील
आजकल
ये धागा तेरा मेरा क्यूँ ना जुड़ सके
आजकल
मैं चाहता नि की किसी का भी दिल दुखे
तो फिर आज कल
क्यूँ बाते होती फीकी तेरे मेरे बीच
तभी आजकल
यह धागा तेरा मेरा नही जुड़ सके
लिपटा है दिल मेरा धागों से, धड़के वो तेरे इशारो पे
पर हूमें फिकर की धागों के, दाग ना हो तेरे हाथों पे
हम दोनो में दूरियाँ काफ़ी
अब भूल चुके क्या तुम कैसा वो नाता था
ऐसा एक वादा था रिश्ता यह जन्मों का
सदियों का, छिड़ है अब वादों से
यह चाँदी अब मिट्टी में मिलने तक, यादों में तेरा बसेरा रहेगा
नज़रों में यादें झलकने पर आँसू बहेंगे तो दिल क्या करेगा
हूमें क्या वो धागे तो टूट चुके है जो दिल से जुड़ी थी
तुमसे खुशी थी अब तुमसे ही दर्द है, धागों का किस्सा बचेगा
तुझ बिन क्या करेगा, यह साँसें भी चलती थी तेरे ही कहने पर
काश मोहब्बत ही होती बस तुमसे, जुदाई के दर्द मैं से लेता
मैं कह देता काफ़ी आसानी से फिर ना मिलेंगे, मैं था तेरे लायक नही
पर यह रिश्ता था बढ़कर हम दोनो से
टुकड़े उन धागों के बिखरे अब शायद कही
आजकल
ये धागा तेरा मेरा क्यूँ ना जुड़ सके
आजकल
मैं चाहता नि की किसी का भी दिल दुखे
तो फिर आज कल
क्यूँ बाते होती फीकी तेरे मेरे बीच
तभी आजकल
यह धागा तेरा मेरा नही जुड़ सके