Sheher Mein Gaon Mein - Jhankar
🎵 2402 characters
⏱️ 4:58 duration
🆔 ID: 6781483
📜 Lyrics
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
"ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?
ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?"
उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
"ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही
ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
इसकी महफ़िल में है हर तरफ़ दिलकशी
शेर सुनते रहे, फिर भी उलझे रहे
शायरी कौन है? दिलकशी कौन है?
उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
"शायरी हो तुम्ही, दिलकशी हो तुम्ही
ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
रात वीरान है चाँदनी जब नहीं
हमको सब थी ख़बर, दिल ने पूछा मगर
"रोशनी कौन है? चाँदनी कौन है?"
उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
"रोशनी हो तुम्ही, चाँदनी हो तुम्ही
ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
शहर में...
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
"ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?
ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?"
उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
"ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही
ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
इसकी महफ़िल में है हर तरफ़ दिलकशी
शेर सुनते रहे, फिर भी उलझे रहे
शायरी कौन है? दिलकशी कौन है?
उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
"शायरी हो तुम्ही, दिलकशी हो तुम्ही
ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
रात वीरान है चाँदनी जब नहीं
हमको सब थी ख़बर, दिल ने पूछा मगर
"रोशनी कौन है? चाँदनी कौन है?"
उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
"रोशनी हो तुम्ही, चाँदनी हो तुम्ही
ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
शहर में...
⏱️ Synced Lyrics
[00:14.66] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[00:22.23] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[00:29.83] ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
[00:37.35] ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
[00:44.97] "ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?
[00:52.85] ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?"
[01:00.29] उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
[01:07.98] "ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही
[01:15.73] ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
[01:24.45]
[01:46.06] एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
[01:57.50] एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
[02:05.17] इसकी महफ़िल में है हर तरफ़ दिलकशी
[02:12.49] शेर सुनते रहे, फिर भी उलझे रहे
[02:20.41] शायरी कौन है? दिलकशी कौन है?
[02:27.97] उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
[02:35.70] "शायरी हो तुम्ही, दिलकशी हो तुम्ही
[02:43.15] ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
[02:50.74] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[02:59.06]
[03:25.15] सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
[03:36.57] सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
[03:44.37] रात वीरान है चाँदनी जब नहीं
[03:51.84] हमको सब थी ख़बर, दिल ने पूछा मगर
[03:59.37] "रोशनी कौन है? चाँदनी कौन है?"
[04:07.27] उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
[04:14.78] "रोशनी हो तुम्ही, चाँदनी हो तुम्ही
[04:22.53] ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
[04:29.93] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[04:37.68] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[04:45.46] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[04:53.12] शहर में...
[04:54.37]
[00:22.23] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[00:29.83] ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
[00:37.35] ख़ुद को रोका बहुत, फिर भी सोचा बहुत
[00:44.97] "ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?
[00:52.85] ज़िंदगी कौन है? बंदगी कौन है?"
[01:00.29] उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
[01:07.98] "ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही
[01:15.73] ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
[01:24.45]
[01:46.06] एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
[01:57.50] एक शहज़ादी है, नाम है "शायरी"
[02:05.17] इसकी महफ़िल में है हर तरफ़ दिलकशी
[02:12.49] शेर सुनते रहे, फिर भी उलझे रहे
[02:20.41] शायरी कौन है? दिलकशी कौन है?
[02:27.97] उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
[02:35.70] "शायरी हो तुम्ही, दिलकशी हो तुम्ही
[02:43.15] ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
[02:50.74] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[02:59.06]
[03:25.15] सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
[03:36.57] सुबह बेजान है रोशनी जब नहीं
[03:44.37] रात वीरान है चाँदनी जब नहीं
[03:51.84] हमको सब थी ख़बर, दिल ने पूछा मगर
[03:59.37] "रोशनी कौन है? चाँदनी कौन है?"
[04:07.27] उफ़! तुम्हारा शबाब दे रहा है जवाब
[04:14.78] "रोशनी हो तुम्ही, चाँदनी हो तुम्ही
[04:22.53] ज़िंदगी हो तुम्ही, बंदगी हो तुम्ही"
[04:29.93] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[04:37.68] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[04:45.46] शहर में, गाँव में, धूप में, छाँव में
[04:53.12] शहर में...
[04:54.37]