Insaan Ne Paise Ke Liye
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🆔 ID: 7059551
📜 Lyrics
इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
हँसते-बसते घर फूँक दिए, धरती को नरक बना डाला
मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
जज़्बात के नाज़ुक रिश्तों को मिट्टी के तले दफ़ना डाला
इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
मंदिर, मस्जिद और गिरजों को बँकों की भेंट चढ़ा डाला
प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
क़ुदरत की बनाई दौलत का सिक्कों में मोल लगा डाला
इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
हँसते-बसते घर फूँक दिए, धरती को नरक बना डाला
मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
जज़्बात के नाज़ुक रिश्तों को मिट्टी के तले दफ़ना डाला
इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
मंदिर, मस्जिद और गिरजों को बँकों की भेंट चढ़ा डाला
प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
क़ुदरत की बनाई दौलत का सिक्कों में मोल लगा डाला
इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
⏱️ Synced Lyrics
[00:25.48] इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
[00:37.66] इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
[00:47.26] हँसते-बसते घर फूँक दिए, धरती को नरक बना डाला
[00:57.36]
[01:06.21] मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
[01:18.28] मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
[01:28.14] जज़्बात के नाज़ुक रिश्तों को मिट्टी के तले दफ़ना डाला
[01:37.70] इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
[01:47.82]
[02:01.78] दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
[02:14.05] दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
[02:23.72] मंदिर, मस्जिद और गिरजों को बँकों की भेंट चढ़ा डाला
[02:33.39]
[02:43.00] प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
[02:55.36] प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
[03:04.92] क़ुदरत की बनाई दौलत का सिक्कों में मोल लगा डाला
[03:14.88] इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
[03:24.92]
[00:37.66] इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
[00:47.26] हँसते-बसते घर फूँक दिए, धरती को नरक बना डाला
[00:57.36]
[01:06.21] मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
[01:18.28] मिट्टी से निकाला सोने को, सोने से बनाए महल, मगर
[01:28.14] जज़्बात के नाज़ुक रिश्तों को मिट्टी के तले दफ़ना डाला
[01:37.70] इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
[01:47.82]
[02:01.78] दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
[02:14.05] दीन और धरम को हार दिया, नेकी को बदी पर वार दिया
[02:23.72] मंदिर, मस्जिद और गिरजों को बँकों की भेंट चढ़ा डाला
[02:33.39]
[02:43.00] प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
[02:55.36] प्यार अपने जगह ख़ुद दौलत है, ये बात ना समझी इंसाँ ने
[03:04.92] क़ुदरत की बनाई दौलत का सिक्कों में मोल लगा डाला
[03:14.88] इंसानों ने पैसे के लिए आपस का प्यार मिटा डाला
[03:24.92]