Vijayi Bhava
🎵 2174 characters
⏱️ 4:23 duration
🆔 ID: 8983851
📜 Lyrics
तिनका तिनका था हमने सँवारा
अपनी वो माटी और घर बारा
लूट रहा ये चमन
अपना वतन आँखो से अपनी
लूट रहा ये चमन
अपना वतन आँखो से अपनी
संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
हर द्वार खोल के
गगन कहे विजय भव
विजय भव
गगन कहे विजय भव
अब लपट लपट का तार बने
और अग्नि सितार बने
अब चले आँधियाँ सनन सनन
गूँजे जयकार बने
हर नैन नैन में ज्वाला हो
हर हृदय हृदय में भाला हो
हर कदम कदम में
सेना की सच्ची ललकार बने
अब भटक भटक आँगारो को
उड़ता चिंगार बने
है रात की सुरंग
भटकी है रौशनी
है छटपटा रही रौशनी
गगन कहे विजय भव
सौंधी सौंधी मिट्टी
बारूदी हो गयी बावरे
ओ... भोली सी तेरी बाँसुरी खो गयी सांवरे
घायल है तेरा जल
तू नदी है राह बदल
पानी बुलबुला रहा है कल-कल-कल
तू निकल तू निकल
माटी ने तेरी आज पुकारा
धरती ये पूछे बारंबारा
लूट्ट रहा ये चमन
तेरा वतन आँखो से अपनी
लूट्ट रहा ये चमन
तेरा वतन आँखो से अपनी
संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
हर द्वार खोल के
गगन कहे विजय भव
गगन कहे विजय भव
हो... विजयी भव
अपनी वो माटी और घर बारा
लूट रहा ये चमन
अपना वतन आँखो से अपनी
लूट रहा ये चमन
अपना वतन आँखो से अपनी
संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
हर द्वार खोल के
गगन कहे विजय भव
विजय भव
गगन कहे विजय भव
अब लपट लपट का तार बने
और अग्नि सितार बने
अब चले आँधियाँ सनन सनन
गूँजे जयकार बने
हर नैन नैन में ज्वाला हो
हर हृदय हृदय में भाला हो
हर कदम कदम में
सेना की सच्ची ललकार बने
अब भटक भटक आँगारो को
उड़ता चिंगार बने
है रात की सुरंग
भटकी है रौशनी
है छटपटा रही रौशनी
गगन कहे विजय भव
सौंधी सौंधी मिट्टी
बारूदी हो गयी बावरे
ओ... भोली सी तेरी बाँसुरी खो गयी सांवरे
घायल है तेरा जल
तू नदी है राह बदल
पानी बुलबुला रहा है कल-कल-कल
तू निकल तू निकल
माटी ने तेरी आज पुकारा
धरती ये पूछे बारंबारा
लूट्ट रहा ये चमन
तेरा वतन आँखो से अपनी
लूट्ट रहा ये चमन
तेरा वतन आँखो से अपनी
संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
हर द्वार खोल के
गगन कहे विजय भव
गगन कहे विजय भव
हो... विजयी भव
⏱️ Synced Lyrics
[00:25.03] तिनका तिनका था हमने सँवारा
[00:29.96] अपनी वो माटी और घर बारा
[00:35.00] लूट रहा ये चमन
[00:39.89] अपना वतन आँखो से अपनी
[00:44.64] लूट रहा ये चमन
[00:50.53] अपना वतन आँखो से अपनी
[00:55.52] संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
[01:00.58] हर द्वार खोल के
[01:03.25] गगन कहे विजय भव
[01:10.94] विजय भव
[01:15.18] गगन कहे विजय भव
[01:37.24] अब लपट लपट का तार बने
[01:39.99] और अग्नि सितार बने
[01:42.72] अब चले आँधियाँ सनन सनन
[01:44.97] गूँजे जयकार बने
[01:47.66] हर नैन नैन में ज्वाला हो
[01:50.54] हर हृदय हृदय में भाला हो
[01:53.16] हर कदम कदम में
[01:54.60] सेना की सच्ची ललकार बने
[01:58.35] अब भटक भटक आँगारो को
[02:00.81] उड़ता चिंगार बने
[02:04.14] है रात की सुरंग
[02:06.66] भटकी है रौशनी
[02:09.10] है छटपटा रही रौशनी
[02:12.86] गगन कहे विजय भव
[02:35.83] सौंधी सौंधी मिट्टी
[02:38.27] बारूदी हो गयी बावरे
[02:43.98] ओ... भोली सी तेरी बाँसुरी खो गयी सांवरे
[02:56.48] घायल है तेरा जल
[02:58.75] तू नदी है राह बदल
[03:01.10] पानी बुलबुला रहा है कल-कल-कल
[03:06.64] तू निकल तू निकल
[03:15.00] माटी ने तेरी आज पुकारा
[03:20.05] धरती ये पूछे बारंबारा
[03:24.81] लूट्ट रहा ये चमन
[03:29.89] तेरा वतन आँखो से अपनी
[03:35.03] लूट्ट रहा ये चमन
[03:40.53] तेरा वतन आँखो से अपनी
[03:45.73] संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
[03:50.88] हर द्वार खोल के
[03:52.65] गगन कहे विजय भव
[04:04.86] गगन कहे विजय भव
[04:11.41] हो... विजयी भव
[04:17.84]
[00:29.96] अपनी वो माटी और घर बारा
[00:35.00] लूट रहा ये चमन
[00:39.89] अपना वतन आँखो से अपनी
[00:44.64] लूट रहा ये चमन
[00:50.53] अपना वतन आँखो से अपनी
[00:55.52] संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
[01:00.58] हर द्वार खोल के
[01:03.25] गगन कहे विजय भव
[01:10.94] विजय भव
[01:15.18] गगन कहे विजय भव
[01:37.24] अब लपट लपट का तार बने
[01:39.99] और अग्नि सितार बने
[01:42.72] अब चले आँधियाँ सनन सनन
[01:44.97] गूँजे जयकार बने
[01:47.66] हर नैन नैन में ज्वाला हो
[01:50.54] हर हृदय हृदय में भाला हो
[01:53.16] हर कदम कदम में
[01:54.60] सेना की सच्ची ललकार बने
[01:58.35] अब भटक भटक आँगारो को
[02:00.81] उड़ता चिंगार बने
[02:04.14] है रात की सुरंग
[02:06.66] भटकी है रौशनी
[02:09.10] है छटपटा रही रौशनी
[02:12.86] गगन कहे विजय भव
[02:35.83] सौंधी सौंधी मिट्टी
[02:38.27] बारूदी हो गयी बावरे
[02:43.98] ओ... भोली सी तेरी बाँसुरी खो गयी सांवरे
[02:56.48] घायल है तेरा जल
[02:58.75] तू नदी है राह बदल
[03:01.10] पानी बुलबुला रहा है कल-कल-कल
[03:06.64] तू निकल तू निकल
[03:15.00] माटी ने तेरी आज पुकारा
[03:20.05] धरती ये पूछे बारंबारा
[03:24.81] लूट्ट रहा ये चमन
[03:29.89] तेरा वतन आँखो से अपनी
[03:35.03] लूट्ट रहा ये चमन
[03:40.53] तेरा वतन आँखो से अपनी
[03:45.73] संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े
[03:50.88] हर द्वार खोल के
[03:52.65] गगन कहे विजय भव
[04:04.86] गगन कहे विजय भव
[04:11.41] हो... विजयी भव
[04:17.84]