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Mehroom

👤 Raman Negi 🎼 Mehroom ⏱️ 3:58
🎵 1824 characters
⏱️ 3:58 duration
🆔 ID: 9048121

📜 Lyrics

महरूम हुए दिन, ये रातें गवाह हैं
है ग़म ये, ख़ुशी क्या? ये कैसे इम्तहाँ हैं?
दर-ब-दर हर शख़्स ढूँढे ज़िंदगी जो लापता है
सुन सके ना बस कोई, दीवारें दरमियाँ हैं

आरज़ू ढूँढे ख़ुशी के ठिकाने
लफ़्ज़ों में क़ैद ज़िंदगी के चंद बहाने
आरज़ू ढूँढे ख़ुशी के ठिकाने
लफ़्ज़ों में क़ैद ज़िंदगी के चंद बहाने

आवाज़ दे मुझे, ओ, मेरे अज़ीज़
क़यामत सी ये शाम जब ढले

थम गया है हर कोई कि नींदें रुसवा हैं
डूबती है पल-पल हसरत, ये कैसे अब मक़ाम हैं
गुम हैं, चुप हैं सर-ज़मीं के रखवाले
निशान-ए-मंज़िल का मुझको तू अब पता दे

आवाज़ दे मुझे, ओ, मेरे अज़ीज़
क़यामत सी ये शाम जब ढले

इस मौसम के तूफ़ाँ कब होंगे किनारे?
शायद कल नया हो तो फ़िर से मुस्कुरा ले
शायद कल नया हो तो फ़िर से मुस्कुरा ले
शायद कल नया हो, ओ
शायद कल नया हो तो फ़िर से मुस्कुरा ले

⏱️ Synced Lyrics

[00:22.39] महरूम हुए दिन, ये रातें गवाह हैं
[00:29.44] है ग़म ये, ख़ुशी क्या? ये कैसे इम्तहाँ हैं?
[00:40.18] दर-ब-दर हर शख़्स ढूँढे ज़िंदगी जो लापता है
[00:47.55] सुन सके ना बस कोई, दीवारें दरमियाँ हैं
[00:54.95] आरज़ू ढूँढे ख़ुशी के ठिकाने
[01:02.40] लफ़्ज़ों में क़ैद ज़िंदगी के चंद बहाने
[01:09.89] आरज़ू ढूँढे ख़ुशी के ठिकाने
[01:17.05] लफ़्ज़ों में क़ैद ज़िंदगी के चंद बहाने
[01:24.85] आवाज़ दे मुझे, ओ, मेरे अज़ीज़
[01:31.71] क़यामत सी ये शाम जब ढले
[01:39.83]
[01:53.84] थम गया है हर कोई कि नींदें रुसवा हैं
[02:01.37] डूबती है पल-पल हसरत, ये कैसे अब मक़ाम हैं
[02:08.86] गुम हैं, चुप हैं सर-ज़मीं के रखवाले
[02:16.16] निशान-ए-मंज़िल का मुझको तू अब पता दे
[02:23.81] आवाज़ दे मुझे, ओ, मेरे अज़ीज़
[02:30.86] क़यामत सी ये शाम जब ढले
[02:38.39]
[03:00.70] इस मौसम के तूफ़ाँ कब होंगे किनारे?
[03:07.99] शायद कल नया हो तो फ़िर से मुस्कुरा ले
[03:15.46] शायद कल नया हो तो फ़िर से मुस्कुरा ले
[03:22.88] शायद कल नया हो, ओ
[03:30.08] शायद कल नया हो तो फ़िर से मुस्कुरा ले
[03:37.33]

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