Part 2
🎵 7572 characters
⏱️ 2:44 duration
🆔 ID: 9652526
📜 Lyrics
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
क़िस्मत का क्या ही क़ुसूर?
और आने पे मौत का क्या ही हो ताज्जुब
मेरे जाने पे रोना ज़रूर
पर होने वो चाहिए ख़ुशी के आँसू
नहीं था होना मशहूर
अब हो ही गया तो गुमनानी का भय क्यूँ?
गवारा नहीं खोना वजूद
ये उल्टी दिशा में हवा दुनिया की बहे क्यूँ?
घुले ना मेरी फ़िज़ा में, घुटे मेरी साँस
दुआ ना मिले तो रहती खोपड़ी खराब
ख़ारिश थी सीने में, गले में ख़राश
कल थे, जनाब, ये फेफड़े नाराज़
ख़लिश ना जीने दे, करदे हिसाब
इस मौत हसीन के देखे थे ख़्वाब
सब मेरा छीन, एक आख़िरी नींद दे
ख़ुदा भी चाहे तो मेरी खुले ना ये आँख
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
ये ज़िंदगी लगती है झूठी उम्मीद
हूँ इंसान मैं बन गया कैसा अजीब
Feel ही नहीं होता अब कुछ भी
तो क्या करूँ जी के या लिख के भी अपना नसीब
ना भरोसा, ना शक़ है किसी पे भी
चेहरों पे जलन, और झूठी हँसी देखी
लिखे दर्द पे अपने लतीफ़े
क्यूँकि आता वक़्त है जब, साथ छोड़ते मसीहे भी
रिश्तों की क़ीमत नहीं जानी
तो तोला भी नहीं मैंने प्यार के तराज़ू में
बनते, बिगड़ते ये क्यूँकि ना जज़्बात ना हालत
ये रहे कभी किसी के क़ाबू में
इज़्ज़त से ऊपर नहीं कुछ
जब तक ज़िंदा हो करम, रकम तो हैं दोनों ही हाथो में
पढ़ें मुझे सब, पर कोई एक भी समझ ले
तो लौट के वापस ख़ुद आ जाऊँगा साबुत मैं
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
...पड़ी भींच के बाजू
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं...
क्या पता रोक दे किसी को मेरी एक आवाज़ ही
जब हो पंखा ऊपर और लटकी फाँसी
फंदा नीचे, पर ना बंदा राज़ी
करे कोशिशें मरने की हर तरह की
मिला ग़ैरों का ठिकाना अपनों के पास ही
करो जिसपे भरोसा, करे धोख़े-बाज़ी
नीचे खींचने के तुझे ढूँढे मौक़े साथी
तेरे जाने पे झूठे मुँह, ये रोके राज़ी
तुझे करना जो ख़तम तो past को कर
कोई सुने या ना सुने, तू आवाज़ तो कर
सन्नाटे में गूँजे जब चीखे किसी की
तो ये दुनिया इल्ज़ाम डाले हादसों पर
जिसे मरना मज़ाक लगे, try करके देखे
ज़िंदगी को final goodbye करके लेटे
खुले आँख तो शुक्रिया तू कहना माँ को
तुझे रखने को ज़िंदा घूमी पेट में वो लेके
अरे, कल का मरता, चाहे आज तू मर
पर पहले सपने में देखे थे जो काम, वो कर
साँसें है, वक़्त ये, और मृत्यु ही सत्य है
मौत पड़ी पीछे सबके, हाथ धो कर
खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
क़िस्मत का क्या ही क़ुसूर?
और आने पे मौत का क्या ही हो ताज्जुब
मेरे जाने पे रोना ज़रूर
पर होने वो चाहिए ख़ुशी के आँसू
नहीं था होना मशहूर
अब हो ही गया तो गुमनानी का भय क्यूँ?
गवारा नहीं खोना वजूद
ये उल्टी दिशा में हवा दुनिया की बहे क्यूँ?
घुले ना मेरी फ़िज़ा में, घुटे मेरी साँस
दुआ ना मिले तो रहती खोपड़ी खराब
ख़ारिश थी सीने में, गले में ख़राश
कल थे, जनाब, ये फेफड़े नाराज़
ख़लिश ना जीने दे, करदे हिसाब
इस मौत हसीन के देखे थे ख़्वाब
सब मेरा छीन, एक आख़िरी नींद दे
ख़ुदा भी चाहे तो मेरी खुले ना ये आँख
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
ये ज़िंदगी लगती है झूठी उम्मीद
हूँ इंसान मैं बन गया कैसा अजीब
Feel ही नहीं होता अब कुछ भी
तो क्या करूँ जी के या लिख के भी अपना नसीब
ना भरोसा, ना शक़ है किसी पे भी
चेहरों पे जलन, और झूठी हँसी देखी
लिखे दर्द पे अपने लतीफ़े
क्यूँकि आता वक़्त है जब, साथ छोड़ते मसीहे भी
रिश्तों की क़ीमत नहीं जानी
तो तोला भी नहीं मैंने प्यार के तराज़ू में
बनते, बिगड़ते ये क्यूँकि ना जज़्बात ना हालत
ये रहे कभी किसी के क़ाबू में
इज़्ज़त से ऊपर नहीं कुछ
जब तक ज़िंदा हो करम, रकम तो हैं दोनों ही हाथो में
पढ़ें मुझे सब, पर कोई एक भी समझ ले
तो लौट के वापस ख़ुद आ जाऊँगा साबुत मैं
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
...पड़ी भींच के बाजू
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं part two
खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
मौत पड़ी भींच के बाजू
सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
मुझे चाहिए नहीं...
क्या पता रोक दे किसी को मेरी एक आवाज़ ही
जब हो पंखा ऊपर और लटकी फाँसी
फंदा नीचे, पर ना बंदा राज़ी
करे कोशिशें मरने की हर तरह की
मिला ग़ैरों का ठिकाना अपनों के पास ही
करो जिसपे भरोसा, करे धोख़े-बाज़ी
नीचे खींचने के तुझे ढूँढे मौक़े साथी
तेरे जाने पे झूठे मुँह, ये रोके राज़ी
तुझे करना जो ख़तम तो past को कर
कोई सुने या ना सुने, तू आवाज़ तो कर
सन्नाटे में गूँजे जब चीखे किसी की
तो ये दुनिया इल्ज़ाम डाले हादसों पर
जिसे मरना मज़ाक लगे, try करके देखे
ज़िंदगी को final goodbye करके लेटे
खुले आँख तो शुक्रिया तू कहना माँ को
तुझे रखने को ज़िंदा घूमी पेट में वो लेके
अरे, कल का मरता, चाहे आज तू मर
पर पहले सपने में देखे थे जो काम, वो कर
साँसें है, वक़्त ये, और मृत्यु ही सत्य है
मौत पड़ी पीछे सबके, हाथ धो कर
खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
⏱️ Synced Lyrics
[00:06.65] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[00:08.20] मौत पड़ी भींच के बाजू
[00:09.50] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[00:11.41] मुझे चाहिए नहीं part two
[00:12.72] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[00:14.33] मौत पड़ी भींच के बाजू
[00:15.99] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[00:17.79] मुझे चाहिए नहीं part two
[00:18.84]
[00:25.07] क़िस्मत का क्या ही क़ुसूर?
[00:26.05] और आने पे मौत का क्या ही हो ताज्जुब
[00:27.90] मेरे जाने पे रोना ज़रूर
[00:29.23] पर होने वो चाहिए ख़ुशी के आँसू
[00:31.24] नहीं था होना मशहूर
[00:32.37] अब हो ही गया तो गुमनानी का भय क्यूँ?
[00:34.20] गवारा नहीं खोना वजूद
[00:35.48] ये उल्टी दिशा में हवा दुनिया की बहे क्यूँ?
[00:37.11] घुले ना मेरी फ़िज़ा में, घुटे मेरी साँस
[00:38.80] दुआ ना मिले तो रहती खोपड़ी खराब
[00:40.37] ख़ारिश थी सीने में, गले में ख़राश
[00:41.95] कल थे, जनाब, ये फेफड़े नाराज़
[00:43.30] ख़लिश ना जीने दे, करदे हिसाब
[00:44.89] इस मौत हसीन के देखे थे ख़्वाब
[00:46.44] सब मेरा छीन, एक आख़िरी नींद दे
[00:48.31] ख़ुदा भी चाहे तो मेरी खुले ना ये आँख
[00:50.46] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[00:52.09] मौत पड़ी भींच के बाजू
[00:53.67] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[00:55.50] मुझे चाहिए नहीं part two
[00:56.75] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[00:58.31] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:02.62] ये ज़िंदगी लगती है झूठी उम्मीद
[01:03.99] हूँ इंसान मैं बन गया कैसा अजीब
[01:05.81] Feel ही नहीं होता अब कुछ भी
[01:06.92] तो क्या करूँ जी के या लिख के भी अपना नसीब
[01:08.70] ना भरोसा, ना शक़ है किसी पे भी
[01:10.13] चेहरों पे जलन, और झूठी हँसी देखी
[01:11.96] लिखे दर्द पे अपने लतीफ़े
[01:13.00] क्यूँकि आता वक़्त है जब, साथ छोड़ते मसीहे भी
[01:15.63] रिश्तों की क़ीमत नहीं जानी
[01:16.63] तो तोला भी नहीं मैंने प्यार के तराज़ू में
[01:18.36] बनते, बिगड़ते ये क्यूँकि ना जज़्बात ना हालत
[01:20.13] ये रहे कभी किसी के क़ाबू में
[01:21.56] इज़्ज़त से ऊपर नहीं कुछ
[01:22.31] जब तक ज़िंदा हो करम, रकम तो हैं दोनों ही हाथो में
[01:24.50] पढ़ें मुझे सब, पर कोई एक भी समझ ले
[01:26.05] तो लौट के वापस ख़ुद आ जाऊँगा साबुत मैं
[01:28.18] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[01:29.79] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:32.95] ...पड़ी भींच के बाजू
[01:34.55] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[01:35.85] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:37.44] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[01:39.35] मुझे चाहिए नहीं part two
[01:40.69] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[01:42.24] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:43.81] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[01:45.67] मुझे चाहिए नहीं...
[01:46.13] क्या पता रोक दे किसी को मेरी एक आवाज़ ही
[01:47.82] जब हो पंखा ऊपर और लटकी फाँसी
[01:49.65] फंदा नीचे, पर ना बंदा राज़ी
[01:50.96] करे कोशिशें मरने की हर तरह की
[01:52.67] मिला ग़ैरों का ठिकाना अपनों के पास ही
[01:54.20] करो जिसपे भरोसा, करे धोख़े-बाज़ी
[01:55.79] नीचे खींचने के तुझे ढूँढे मौक़े साथी
[01:57.32] तेरे जाने पे झूठे मुँह, ये रोके राज़ी
[01:58.92] तुझे करना जो ख़तम तो past को कर
[02:00.58] कोई सुने या ना सुने, तू आवाज़ तो कर
[02:02.19] सन्नाटे में गूँजे जब चीखे किसी की
[02:03.71] तो ये दुनिया इल्ज़ाम डाले हादसों पर
[02:05.00] जिसे मरना मज़ाक लगे, try करके देखे
[02:06.67] ज़िंदगी को final goodbye करके लेटे
[02:08.24] खुले आँख तो शुक्रिया तू कहना माँ को
[02:09.87] तुझे रखने को ज़िंदा घूमी पेट में वो लेके
[02:11.53] अरे, कल का मरता, चाहे आज तू मर
[02:12.86] पर पहले सपने में देखे थे जो काम, वो कर
[02:14.75] साँसें है, वक़्त ये, और मृत्यु ही सत्य है
[02:16.48] मौत पड़ी पीछे सबके, हाथ धो कर
[02:18.37] खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
[02:20.76] करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
[02:24.67] खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
[02:27.06] मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
[02:30.83] खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
[02:33.21] करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
[02:37.26] खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
[02:39.45] मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
[02:42.88]
[00:08.20] मौत पड़ी भींच के बाजू
[00:09.50] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[00:11.41] मुझे चाहिए नहीं part two
[00:12.72] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[00:14.33] मौत पड़ी भींच के बाजू
[00:15.99] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[00:17.79] मुझे चाहिए नहीं part two
[00:18.84]
[00:25.07] क़िस्मत का क्या ही क़ुसूर?
[00:26.05] और आने पे मौत का क्या ही हो ताज्जुब
[00:27.90] मेरे जाने पे रोना ज़रूर
[00:29.23] पर होने वो चाहिए ख़ुशी के आँसू
[00:31.24] नहीं था होना मशहूर
[00:32.37] अब हो ही गया तो गुमनानी का भय क्यूँ?
[00:34.20] गवारा नहीं खोना वजूद
[00:35.48] ये उल्टी दिशा में हवा दुनिया की बहे क्यूँ?
[00:37.11] घुले ना मेरी फ़िज़ा में, घुटे मेरी साँस
[00:38.80] दुआ ना मिले तो रहती खोपड़ी खराब
[00:40.37] ख़ारिश थी सीने में, गले में ख़राश
[00:41.95] कल थे, जनाब, ये फेफड़े नाराज़
[00:43.30] ख़लिश ना जीने दे, करदे हिसाब
[00:44.89] इस मौत हसीन के देखे थे ख़्वाब
[00:46.44] सब मेरा छीन, एक आख़िरी नींद दे
[00:48.31] ख़ुदा भी चाहे तो मेरी खुले ना ये आँख
[00:50.46] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[00:52.09] मौत पड़ी भींच के बाजू
[00:53.67] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[00:55.50] मुझे चाहिए नहीं part two
[00:56.75] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[00:58.31] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:02.62] ये ज़िंदगी लगती है झूठी उम्मीद
[01:03.99] हूँ इंसान मैं बन गया कैसा अजीब
[01:05.81] Feel ही नहीं होता अब कुछ भी
[01:06.92] तो क्या करूँ जी के या लिख के भी अपना नसीब
[01:08.70] ना भरोसा, ना शक़ है किसी पे भी
[01:10.13] चेहरों पे जलन, और झूठी हँसी देखी
[01:11.96] लिखे दर्द पे अपने लतीफ़े
[01:13.00] क्यूँकि आता वक़्त है जब, साथ छोड़ते मसीहे भी
[01:15.63] रिश्तों की क़ीमत नहीं जानी
[01:16.63] तो तोला भी नहीं मैंने प्यार के तराज़ू में
[01:18.36] बनते, बिगड़ते ये क्यूँकि ना जज़्बात ना हालत
[01:20.13] ये रहे कभी किसी के क़ाबू में
[01:21.56] इज़्ज़त से ऊपर नहीं कुछ
[01:22.31] जब तक ज़िंदा हो करम, रकम तो हैं दोनों ही हाथो में
[01:24.50] पढ़ें मुझे सब, पर कोई एक भी समझ ले
[01:26.05] तो लौट के वापस ख़ुद आ जाऊँगा साबुत मैं
[01:28.18] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[01:29.79] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:32.95] ...पड़ी भींच के बाजू
[01:34.55] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[01:35.85] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:37.44] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[01:39.35] मुझे चाहिए नहीं part two
[01:40.69] खुली भला आँख क्यूँ? मैं बढ़िया था नीद में
[01:42.24] मौत पड़ी भींच के बाजू
[01:43.81] सुकून की दो घड़ियाँ नसीब, बड़ी है अजीब life
[01:45.67] मुझे चाहिए नहीं...
[01:46.13] क्या पता रोक दे किसी को मेरी एक आवाज़ ही
[01:47.82] जब हो पंखा ऊपर और लटकी फाँसी
[01:49.65] फंदा नीचे, पर ना बंदा राज़ी
[01:50.96] करे कोशिशें मरने की हर तरह की
[01:52.67] मिला ग़ैरों का ठिकाना अपनों के पास ही
[01:54.20] करो जिसपे भरोसा, करे धोख़े-बाज़ी
[01:55.79] नीचे खींचने के तुझे ढूँढे मौक़े साथी
[01:57.32] तेरे जाने पे झूठे मुँह, ये रोके राज़ी
[01:58.92] तुझे करना जो ख़तम तो past को कर
[02:00.58] कोई सुने या ना सुने, तू आवाज़ तो कर
[02:02.19] सन्नाटे में गूँजे जब चीखे किसी की
[02:03.71] तो ये दुनिया इल्ज़ाम डाले हादसों पर
[02:05.00] जिसे मरना मज़ाक लगे, try करके देखे
[02:06.67] ज़िंदगी को final goodbye करके लेटे
[02:08.24] खुले आँख तो शुक्रिया तू कहना माँ को
[02:09.87] तुझे रखने को ज़िंदा घूमी पेट में वो लेके
[02:11.53] अरे, कल का मरता, चाहे आज तू मर
[02:12.86] पर पहले सपने में देखे थे जो काम, वो कर
[02:14.75] साँसें है, वक़्त ये, और मृत्यु ही सत्य है
[02:16.48] मौत पड़ी पीछे सबके, हाथ धो कर
[02:18.37] खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
[02:20.76] करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
[02:24.67] खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
[02:27.06] मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
[02:30.83] खुली तेरी आँख तो तू जान के जान ये कितनी है क़ीमती
[02:33.21] करने थे पूरे अधूरे जो सपने, ज़रूरत ही नहीं थी उन्हें तो कभी नींद की
[02:37.26] खुली अब है आँख तो तू जाना के जन्नत नसीब तुझे जीते जी
[02:39.45] मरे तेरे दुश्मन, तू जी हर साँस में ज़िंदगी अपने हिसाब और तरीक़े की
[02:42.88]