Nigahen Milane Ko Jee Chahta Hai
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📜 Lyrics
राज़ की बात है महफ़िल में कहें या ना कहें
बस गया है कोई इस दिल में कहें ये या ना कहें
—कहें ये या ना कहें
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
ओ, निगाहें मिलाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जाँ लूटाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जाँ लूटाने-लूटाने को जी चाहता है
—जी चाहता है
(...)
वो तोहमत जिसे "इश्क़" कहती है दुनिया
वो तोहमत जिसे "इश्क़" कहती है दुनिया
—कहती है दुनिया
वो तोहमत जिसे "इश्क़" कहती है दुनिया
वो तोहमत उठाने को जी चाहता है
वो तोहमत उठाने को जी चाहता है
वो तोहमत उठाने-उठाने को जी चाहता है
—जी चाहता है
आssss
किसी के मनाने में लज़्ज़त वो पाई
किसी के मनाने में लज़्ज़त वो पाई
—लज़्ज़त वो पाई
किसी के मनाने में लज़्ज़त वो पाई
के फ़िर रूठ जाने को जी चाहता है
के फ़िर रूठ जाने को जी चाहता है
मेरा रूठ जाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जाँ लूटाने को जी चाहता है
(...)
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
—है सामने भी
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने-चुराने को जी चाहता है
—जी चाहता है
(...)
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
ओ, जिस घड़ी मेरी निगाहों को तेरी दीद हुई
वो घड़ी मेरे लिए ऐश की तमहीद हुई
जब कभी मैंने तेरा चाँद सा चेहरा देखा
जब कभी मैंने तेरा चाँद सा चेहरा देखा
ईद हो या के ना हो, मेरे लिए ईद हुई
आही, ईद हो या के ना हो, मेरे लिए ईद हुई
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
नी रे ग
ग रे ग नी रे म
म ग म नी रे ग
ग रे ग नी ग रे
रे ग ग म म ध नी
सा सा नी नी ध ध प प ग रे
सा सा नी नी ध प म ग रे
नी ध प म ग रे सा नी रे ग
मुलाक़ात का कोई पैग़ाम दीजे के
छुप-छुप के आने को जी चाहता है
और आके ना जाने को जी चाहता है
और आके ना जाने को जी चाहता है
—जी चाहता है
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
बस गया है कोई इस दिल में कहें ये या ना कहें
—कहें ये या ना कहें
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
ओ, निगाहें मिलाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जाँ लूटाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जाँ लूटाने-लूटाने को जी चाहता है
—जी चाहता है
(...)
वो तोहमत जिसे "इश्क़" कहती है दुनिया
वो तोहमत जिसे "इश्क़" कहती है दुनिया
—कहती है दुनिया
वो तोहमत जिसे "इश्क़" कहती है दुनिया
वो तोहमत उठाने को जी चाहता है
वो तोहमत उठाने को जी चाहता है
वो तोहमत उठाने-उठाने को जी चाहता है
—जी चाहता है
आssss
किसी के मनाने में लज़्ज़त वो पाई
किसी के मनाने में लज़्ज़त वो पाई
—लज़्ज़त वो पाई
किसी के मनाने में लज़्ज़त वो पाई
के फ़िर रूठ जाने को जी चाहता है
के फ़िर रूठ जाने को जी चाहता है
मेरा रूठ जाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जाँ लूटाने को जी चाहता है
(...)
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
—है सामने भी
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने-चुराने को जी चाहता है
—जी चाहता है
(...)
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
ओ, जिस घड़ी मेरी निगाहों को तेरी दीद हुई
वो घड़ी मेरे लिए ऐश की तमहीद हुई
जब कभी मैंने तेरा चाँद सा चेहरा देखा
जब कभी मैंने तेरा चाँद सा चेहरा देखा
ईद हो या के ना हो, मेरे लिए ईद हुई
आही, ईद हो या के ना हो, मेरे लिए ईद हुई
वो जलवा जो ओझल भी, है सामने भी
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
नी रे ग
ग रे ग नी रे म
म ग म नी रे ग
ग रे ग नी ग रे
रे ग ग म म ध नी
सा सा नी नी ध ध प प ग रे
सा सा नी नी ध प म ग रे
नी ध प म ग रे सा नी रे ग
मुलाक़ात का कोई पैग़ाम दीजे के
छुप-छुप के आने को जी चाहता है
और आके ना जाने को जी चाहता है
और आके ना जाने को जी चाहता है
—जी चाहता है
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
निगाहें मिलाने को जी चाहता है