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Swapna Jhare Phool Se

👤 Mohammed Rafi 🎼 Nai Umar Ki Nai Fasal (Original Motion Picture Soundtrack) ⏱️ 5:55
🎵 3482 characters
⏱️ 5:55 duration
🆔 ID: 976529

📜 Lyrics

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से
लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे

नींद भी खुली ना थी कि, हाय, धूप ढल गई
पाँव जब-तलक उठे कि ज़िंदगी फ़िसल गई
पात-पात झर गए कि शाख़-शाख़ जल गई
चाह तो निकल सकी ना, पर उमर निकल गई, पर उमर निकल गई

गीत अश्क बन गए, स्वप्न हो दफ़न गए
साथ के सभी दीये धुआँ पहन-पहन गएँ
और हम झुके-झुके मोड़ पर रुके-रुके
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे

क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा
क्या कमाल था कि, देख, आईना सहर उठा
इस तरफ़ ज़मीन और आसमाँ उधर उठा
थाम कर जिगर उठा, कि जो मिला नज़र उठा, कि जो मिला नज़र उठा

एक दिन मगर यहाँ ऐसी कुछ हवा चली
लुट गई कली-कली कि घुट गई गली-गली
और हम लुटे-लुटे वक़्त से पिटे-पिटे
साज़ की शराब का ख़ुमार देखते रहे

कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे

हाथ थे मिले कि ज़ुल्फ़ चाँद की सँवार दूँ
होंठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ
और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ, भूमी पर उतार दूँ

हो सका ना कुछ, मगर, शाम बन गई सहर
वो उठी लहर कि ढह गए किले बिख़र-बिख़र
और हम डरे-डरे नीर नैन में भरे
ओढ़ कर कफ़न पड़े मज़ार देखते रहे

माँग भर चली कि एक जब नयी-नयी किरण
ढोलकें धुनक उठीं, ठुमक उठे चरण-चरण
शोर मच गया कि लो चली दुल्हन, चली दुल्हन
गाँव सब उमड़ पड़ा, बहक उठे नयन-नयन, बहक उठे नयन-नयन

पर तभी ज़हर भरी गाज़ एक वह गिरी
पुँछ गया सिंदूर, तार-तार हुई चूनरी
और हम अजान से, दूर के मकान से
पालकी लिए हुए कहार देखते रहे

कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे

⏱️ Synced Lyrics

[00:26.52] स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से
[00:33.96] लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
[00:40.97] और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
[00:47.66] कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे
[00:54.12]
[01:04.61] नींद भी खुली ना थी कि, हाय, धूप ढल गई
[01:11.27] पाँव जब-तलक उठे कि ज़िंदगी फ़िसल गई
[01:17.82] पात-पात झर गए कि शाख़-शाख़ जल गई
[01:24.49] चाह तो निकल सकी ना, पर उमर निकल गई, पर उमर निकल गई
[01:37.83] गीत अश्क बन गए, स्वप्न हो दफ़न गए
[01:45.22] साथ के सभी दीये धुआँ पहन-पहन गएँ
[01:52.07] और हम झुके-झुके मोड़ पर रुके-रुके
[01:58.69] उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे
[02:05.22]
[02:15.30] क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा
[02:21.91] क्या कमाल था कि, देख, आईना सहर उठा
[02:28.72] इस तरफ़ ज़मीन और आसमाँ उधर उठा
[02:35.13] थाम कर जिगर उठा, कि जो मिला नज़र उठा, कि जो मिला नज़र उठा
[02:48.60] एक दिन मगर यहाँ ऐसी कुछ हवा चली
[02:55.49] लुट गई कली-कली कि घुट गई गली-गली
[03:02.26] और हम लुटे-लुटे वक़्त से पिटे-पिटे
[03:08.96] साज़ की शराब का ख़ुमार देखते रहे
[03:15.24] कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे
[03:22.06]
[03:35.22] हाथ थे मिले कि ज़ुल्फ़ चाँद की सँवार दूँ
[03:41.97] होंठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ
[03:48.42] दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ
[03:55.03] और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ, भूमी पर उतार दूँ
[04:08.25] हो सका ना कुछ, मगर, शाम बन गई सहर
[04:15.04] वो उठी लहर कि ढह गए किले बिख़र-बिख़र
[04:21.81] और हम डरे-डरे नीर नैन में भरे
[04:28.35] ओढ़ कर कफ़न पड़े मज़ार देखते रहे
[04:34.90]
[04:47.88] माँग भर चली कि एक जब नयी-नयी किरण
[04:54.43] ढोलकें धुनक उठीं, ठुमक उठे चरण-चरण
[05:00.97] शोर मच गया कि लो चली दुल्हन, चली दुल्हन
[05:07.26] गाँव सब उमड़ पड़ा, बहक उठे नयन-नयन, बहक उठे नयन-नयन
[05:17.52]
[05:20.80] पर तभी ज़हर भरी गाज़ एक वह गिरी
[05:27.53] पुँछ गया सिंदूर, तार-तार हुई चूनरी
[05:34.27] और हम अजान से, दूर के मकान से
[05:40.88] पालकी लिए हुए कहार देखते रहे
[05:47.16] कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे
[05:53.57]

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