Suhani Raat Dhal Chuki Na
🎵 1984 characters
⏱️ 4:57 duration
🆔 ID: 9862698
📜 Lyrics
याद ना जाए बीते दिनों की
जाके ना आएँ जो दिन दिल क्यूँ बुलाए?
उन्हें दिल क्यूँ बुलाए?
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
नज़ारे अपनी मस्तियाँ दिखा-दिखा के सो गए
सितारे अपनी रोशनी लुटा-लुटा के सो गए
हर एक शम्मा जल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
तड़प रहे हैं हम यहाँ...
तड़प रहे हैं हम यहाँ तुम्हारे इंतज़ार में, तुम्हारे इंतज़ार में
ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में
ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में, मौसम-ए-बहार में
हवा भी रुख़ बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
जाके ना आएँ जो दिन दिल क्यूँ बुलाए?
उन्हें दिल क्यूँ बुलाए?
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
नज़ारे अपनी मस्तियाँ दिखा-दिखा के सो गए
सितारे अपनी रोशनी लुटा-लुटा के सो गए
हर एक शम्मा जल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
तड़प रहे हैं हम यहाँ...
तड़प रहे हैं हम यहाँ तुम्हारे इंतज़ार में, तुम्हारे इंतज़ार में
ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में
ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में, मौसम-ए-बहार में
हवा भी रुख़ बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
⏱️ Synced Lyrics
[00:00.37] याद ना जाए बीते दिनों की
[00:10.23] जाके ना आएँ जो दिन दिल क्यूँ बुलाए?
[00:17.66] उन्हें दिल क्यूँ बुलाए?
[00:24.77] हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
[00:30.21] बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
[00:35.67]
[00:50.99] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:04.73] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:18.12] जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:31.97] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:43.96]
[01:56.02] नज़ारे अपनी मस्तियाँ दिखा-दिखा के सो गए
[02:09.44] सितारे अपनी रोशनी लुटा-लुटा के सो गए
[02:23.04] हर एक शम्मा जल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[02:36.43] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[02:48.75]
[03:05.09] तड़प रहे हैं हम यहाँ...
[03:15.89] तड़प रहे हैं हम यहाँ तुम्हारे इंतज़ार में, तुम्हारे इंतज़ार में
[03:34.69] ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में
[03:45.46] ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में, मौसम-ए-बहार में
[04:02.56] हवा भी रुख़ बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[04:15.93] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[04:29.35] जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[04:44.65]
[00:10.23] जाके ना आएँ जो दिन दिल क्यूँ बुलाए?
[00:17.66] उन्हें दिल क्यूँ बुलाए?
[00:24.77] हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
[00:30.21] बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
[00:35.67]
[00:50.99] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:04.73] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:18.12] जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:31.97] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[01:43.96]
[01:56.02] नज़ारे अपनी मस्तियाँ दिखा-दिखा के सो गए
[02:09.44] सितारे अपनी रोशनी लुटा-लुटा के सो गए
[02:23.04] हर एक शम्मा जल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[02:36.43] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[02:48.75]
[03:05.09] तड़प रहे हैं हम यहाँ...
[03:15.89] तड़प रहे हैं हम यहाँ तुम्हारे इंतज़ार में, तुम्हारे इंतज़ार में
[03:34.69] ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में
[03:45.46] ख़िज़ाँ का रंग आ चला है मौसम-ए-बहार में, मौसम-ए-बहार में
[04:02.56] हवा भी रुख़ बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[04:15.93] सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[04:29.35] जहाँ की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
[04:44.65]